

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बैरकपुर: पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों के साथ-साथ बैरकपुर स्थित जनस्वास्थ्य तकनीकी विभाग (PHE) के कार्यालय में मंगलवार को ठेकेदारों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। 'जल जीवन मिशन' और विभाग के अन्य महत्वपूर्ण कार्यों का लंबे समय से बकाया भुगतान न होने के कारण ठेकेदारों ने कामकाज ठप कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
प्रदर्शनकारी ठेकेदारों का आरोप है कि उन्होंने सरकार के निर्देशानुसार 'आपातकालीन' आधार पर परियोजनाओं को समय पर पूरा किया, लेकिन पिछले 18 महीनों से उनके बिलों का भुगतान अटका हुआ है। ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान न मिलने के कारण वे गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं। न केवल उनकी अपनी पूंजी समाप्त हो गई है, बल्कि उन श्रमिकों और कर्मचारियों का भी भविष्य संकट में है जो इन परियोजनाओं से जुड़े हुए हैं।
मीडिया से बातचीत करते हुए प्रदर्शनकारी ठेकेदारों ने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान और प्रशासनिक जटिलताओं का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। 'जल जीवन मिशन' केंद्र और राज्य की साझा परियोजना है, लेकिन फंड के आवंटन को लेकर चल रहे विवाद के कारण ठेकेदारों का पैसा रुका हुआ है।
एक ठेकेदार ने व्यथा सुनाते हुए कहा, "हम 18 महीने से अपनी जेब से पैसा लगाकर काम कर रहे हैं। अब हमारे पास कोई चारा नहीं बचा है। सरकार की ओर से केवल आश्वासन मिल रहा है, समाधान नहीं।"
बैरकपुर डिवीजनल कार्यालय के सामने आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से ठेकेदारों ने विभाग को अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही बकाया राशि का निपटारा नहीं किया गया, तो वे राज्यव्यापी स्तर पर "बृहत्तर आंदोलन" शुरू करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में वे विभागीय कार्यों का बहिष्कार भी कर सकते हैं, जिससे सरकारी जलापूर्ति योजनाओं के रख-रखाव और क्रियान्वयन पर सीधा असर पड़ेगा।
इस प्रदर्शन ने राज्य के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में काम कर रहे ठेकेदारों की असुरक्षा और सरकारी परियोजनाओं में आ रही बाधाओं को एक बार फिर सामने ला दिया है।