डीम्ड विश्वविद्यालय के विरोध में आंदोलन तेज

केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग पर अड़े छात्र
डीम्ड विश्वविद्यालय के विरोध में आंदोलन तेज
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम :अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में प्रस्तावित डीम्ड विश्वविद्यालय के विरोध में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस संबंध में अभियान समिति, एएनटीसीसी के अध्यक्ष टीएसजी भास्कर और संगठन के प्रवक्ता तमिल सेल्वम ने मीडिया से बातचीत कर अपनी बात रखी और आगे की रणनीति की जानकारी दी। अध्यक्ष टीएसजी भास्कर ने कहा कि 16 फरवरी को आयोजित अंडमान बंद पूर्ण रूप से सफल रहा। उन्होंने इसके लिए मीडिया, अभिभावकों और आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि बंद के बाद छात्रों ने प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम तक शांतिपूर्ण धरना देने का निर्णय लिया था। अब कुछ छात्र सुबह से धरना देने की मांग कर रहे हैं, जिस पर संयुक्त कार्य मंच शीघ्र निर्णय लेगा।उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में छात्रों और अभिभावकों के साथ एक मोमबत्ती मार्च निकाला जाएगा, जो तिरंगा पार्क में समाप्त होगा, जहां एक सार्वजनिक सभा आयोजित की जाएगी। साथ ही, इस मामले में न्यायालय में याचिका दायर करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

भास्कर ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि यदि समय रहते उचित निर्णय लिया जाए तो छात्रों को सड़कों पर बैठने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि डीम्ड विश्वविद्यालय स्वीकार्य नहीं है और क्षेत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना ही एकमात्र समाधान है।संगठन के प्रवक्ता तमिल सेल्वम ने कहा कि डिगलीपुर से कैंपबेल बे तक पूरे द्वीपसमूह में बंद को व्यापक समर्थन मिला। बाजार, निजी संस्थान, परिवहन और पर्यटन क्षेत्र ने भी सहयोग किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि धरने पर बैठे छात्रों पर प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है। कुछ छात्रों को कक्षा से बाहर निकालने और पहचान पत्र की तस्वीर लेकर डराने-धमकाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

सेल्वम ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि अंडमान के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए है। उन्होंने आशंका जताई कि डीम्ड विश्वविद्यालय बनने की स्थिति में शुल्क में भारी वृद्धि हो सकती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय की डिग्री की मान्यता और गुणवत्ता को लेकर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं, जिससे भविष्य में छात्रों को रोजगार प्राप्त करने में बाधाएं आ सकती हैं।

दोनों नेताओं ने दोहराया कि अंडमान-निकोबार में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना ही स्थायी और उचित समाधान है। उन्होंने अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अपील की कि वे छात्रों के समर्थन में आगे आएं और इस आंदोलन को सफल बनाएं।

उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायालय से सकारात्मक निर्णय मिलेगा और छात्रों का संघर्ष अंततः सफल होगा।

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