शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रदान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस

कांग्रेस के राज्यसभा मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने सोमवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रदान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया।
शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रदान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस
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कांग्रेस के राज्यसभा मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने सोमवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रदान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधान ने अपने बयानों से संसद और संसदीय समितियों की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। यह नोटिस राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को सौंपा गया है।

मामला 15 मई को हुई उस प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है, जिसमें NEET-UG परीक्षा रद्द होने के बाद शिक्षा मंत्री ने मीडिया से बातचीत की थी। जयराम रमेश का कहना है कि इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने संसदीय समिति को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की, जो संसद के प्रति उनकी अवमानना को दिखाती है।

रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, मैंने राज्यसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली के नियम 187 के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है, क्योंकि उन्होंने संसद और संसदीय समितियों की गरिमा को कम किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय में फैली अव्यवस्था देश के लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही है और मंत्री उसी दौरान इस तरह की “आपत्तिजनक टिप्पणियां” कर रहे हैं।

जयराम रमेश ने अपने नोटिस में बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने धर्मेंद्र प्रधान से पूछा था कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को लेकर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों को सरकार ने क्यों लागू नहीं किया। इसके जवाब में मंत्री ने कहा, मैं संसद की स्थायी समिति के रेड फ्लैग्स पर टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं हाई लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स (HLCE)/राधाकृष्णन समिति के बारे में बात करूंगा। संसद की स्थायी समिति में विपक्ष के सदस्य होते हैं। वे चीजों को एक खास तरीके से लिखते हैं, आप भी जानते हैं। इसलिए मैं स्थायी समिति पर कुछ नहीं बोलूंगा।

कांग्रेस नेता ने इन टिप्पणियों को बेहद आपत्तिजनक बताया। उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां संसद का ही विस्तार होती हैं और इन्हें मिनी संसद कहा जाता है। ऐसे में समितियों पर सवाल उठाना संसद की गरिमा पर सवाल उठाने जैसा है।

रमेश ने कहा कि मंत्री की टिप्पणियां संसद, संसदीय समितियों और सभी दलों के सांसदों का अपमान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान ने सिर्फ इसलिए स्थायी समिति की प्रतिष्ठा को कम करने की कोशिश की, क्योंकि उसमें विपक्ष के सदस्य भी शामिल हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय समितियों या उनके सदस्यों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना सदन की अवमानना माना जाता है। इसलिए शिक्षा मंत्री का यह आचरण विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का गंभीर मामला है। रमेश ने राज्यसभा सभापति से मांग की है कि धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई शुरू की जाए।

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