उत्तर 24 परगना में दम तोड़ती निजी बस सेवाएं ! रूट हुए कम  

Private bus services are collapsing in North 24 Parganas! Routes have been reduced.
फाइल फोटो REP
Published on

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बारासात : उत्तर 24 परगना जिले में कभी परिवहन की रीढ़ मानी जाने वाली निजी बस सेवाएं अब अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। जिले के तीन प्रमुख केंद्रों, बनगांव के मोतीगंज इछामती बस टर्मिनल, बशीरहाट-हसनाबाद और बारासात के तितुमीर बस टर्मिनल से चलने वाली बसों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, पहले इन क्षेत्रों से कुल 59 रूटों पर बसें चलती थीं, लेकिन अब यह घटकर केवल 40 से 45 रूटों तक सीमित रह गई हैं। बसों के लगातार बंद होने से बस मालिकों और श्रमिकों में भारी निराशा है। घटती संख्या और बढ़ती चुनौतियां बारासात तितुमीर बस स्टैंड वर्कर्स यूनियन के संयोजक अमलेंदु घोष ने इस संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि महज दो-तीन साल पहले तक इस टर्मिनल से लगभग 800 निजी बसें संचालित होती थीं। वर्तमान में यह संख्या घटकर 600 से 650 के बीच रह गई है। लगभग हर रूट पर बसों की संख्या आधी हो चुकी है। बारासात जैसे व्यस्त इलाके में भी अब गिने-चुने निजी प्रयास ही परिवहन व्यवस्था को थामे हुए हैं।

कोलकाता में कार्यस्थलों पर जाने के लिए मुख्य रूप से ट्रेनों पर निर्भर हैं

रेलवे और वैकल्पिक साधनों का प्रभाव बनगांव संगठनात्मक जिला आईएनटीटीयूसी (INTTUC) के अध्यक्ष नारायण घोष के अनुसार, बनगांव के लोग कोलकाता के अस्पतालों या कार्यस्थलों पर जाने के लिए मुख्य रूप से ट्रेनों पर निर्भर हैं। समय की बचत और कम किराए के कारण लोग बसों के बजाय ट्रेन, टोटो, ऑटो और निजी गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी कड़ी में एक कॉलेज छात्र ने बताया कि जहां ट्रेन का टिकट महज 5 रुपये में मिल जाता है, वहीं बस से उसी दूरी को तय करने के लिए 18 से 20 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा, सड़कों पर बढ़ता जाम भी यात्रियों को बसों से दूर कर रहा है।

नए निवेशक बस खरीदकर रूट पर चलाने का जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं ! 

भविष्य की अनिश्चितता बारासात के उप-नगर प्रमुख और आईएनटीटीयूसी अध्यक्ष तापस दासगुप्ता ने इस स्थिति को 'गंभीर' बताया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में नए निवेशक बस खरीदकर रूट पर चलाने का जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं। ओला-उबर जैसी कैब सेवाओं और ऐप-आधारित परिवहन के बढ़ते चलन ने मध्यम वर्गीय यात्रियों को बसों से पूरी तरह काट दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में जिले की बस सेवा पूरी तरह ठप हो सकती है। हालांकि, प्रशासन अब बनगांव जैसे क्षेत्रों से आधुनिक 'एसी बस' सेवा शुरू करने पर विचार कर रहा है ताकि यात्रियों को वापस आकर्षित किया जा सके।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in