

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बारासात: सरकारी शिक्षा व्यवस्था की मर्यादा उस वक्त तार-तार हो गई जब हबड़ा के एक जूनियर बेसिक स्कूल में गरीब छात्रों से टीसी (TC) के बदले अवैध वसूली का मामला सामने आया। नियमों के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय छोड़ने वाले छात्रों को टीसी देने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन इस स्कूल में प्रत्येक छात्र से ₹300 की मांग की जा रही है। इस घटना को लेकर क्षेत्र के अभिभावकों में भारी आक्रोश है और उन्होंने हबड़ा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
अभिभावकों का आरोप है कि यह वसूली पिछले साल स्कूल में नए प्रधान शिक्षक के कार्यभार संभालने के बाद से शुरू हुई है। अभिभावक रुमा विश्वास और जगन्नाथ साहा ने बताया कि स्कूल प्रशासन बिना किसी वैध रसीद के ₹300 जमा करने का दबाव बना रहा है। जो गरीब परिवार यह राशि देने में असमर्थ हैं, उन्हें टीसी देने से साफ मना कर दिया गया है। आरोप है कि जब कुछ अभिभावकों ने इसका विरोध किया, तो प्रधान शिक्षक ने उन्हें धमकाया और बच्चों का भविष्य खराब करने की बात कही।
शिकायतकर्ता निर्मल मल्लिक ने एक और चौंकाने वाली विसंगति की ओर इशारा किया है। आरोप है कि जो टीसी साल 2026 में जारी की जा रही है, उस पर पिछले साल यानी 2025 की तारीख अंकित की गई है। यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही है बल्कि एक बड़े फर्जीवाड़े की ओर भी इशारा करती है। अभिभावकों का कहना है कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है ताकि पिछले रिकॉर्ड्स में हेरफेर किया जा सके।
चूंकि आरोपित प्रधान शिक्षक सत्तारूढ़ दल के शिक्षक सेल के नेता बताए जा रहे हैं, इसलिए इस मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा नेता देवज्योति दाम ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि तृणमूल समर्थित शिक्षक अब मासूम छात्रों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। दूसरी ओर, विवाद बढ़ता देख हबड़ा नगरपालिका के चेयरमैन नारायण चंद्र साहा ने कहा, "टीसी के बदले पैसे लेना पूरी तरह गैरकानूनी है। हम मामले की विस्तृत जांच करेंगे और यदि आरोप सही पाए गए, तो न केवल प्रशासनिक बल्कि दलीय स्तर पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"
फिलहाल, पुलिस ने अभिभावकों की शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है और स्कूल के अन्य शिक्षकों से भी पूछताछ की जा रही है। स्कूल प्रबंधन ने अभी तक इन आरोपों पर अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।