New Delhi
9 नवंबर से लागू होंगी नई दरें

कैंसर की 543 दवाओं की कीमतें बदलीं

217 दवाओं की कीमत आधे से भी कम, 5 के दाम 90% से ज्यादा घटे; 9 नवंबर से लागू होंगी नई दरें
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नयी दिल्ली : कैंसर के इलाज पर होने वाला खर्च कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के फैसले के बाद कैंसर की 543 दवा ब्रांडों और पैक की कीमतों में बदलाव किया गया है। इनमें 397 दवाओं के दाम घटाए गए हैं, जबकि 146 ब्रांड-पैक की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। नई कीमतें 9 नवंबर से लागू होंगी। इस फैसले से कैंसर के मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है।सबसे बड़ी कटौती सैमटेपा इंजेक्शन की कीमत में हुई है। इसकी कीमत 80,071 रुपये से घटाकर 7,150 रुपये कर दी गई है। यानी अब मरीजों को इस इंजेक्शन के लिए पहले के मुकाबले करीब 91% कम कीमत चुकानी होगी। इसी तरह, पैलबोप्रो दवा के 21 कैप्सूल वाले पैक की कीमत 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये कर दी गई है। यह कटौती करीब 93% है।

217 दवाओं के दाम आधे से भी कम

कीमतों में हुई कटौती का दायरा काफी व्यापक है। कुल 543 दवा ब्रांडों और पैक में से 217 की कीमतें आधे से भी कम हो गई हैं। वहीं, 97 ब्रांड की दवाओं के दाम 70% से ज्यादा घटाए गए हैं। इनमें से 50 ब्रांड की कीमतों में 80% से अधिक और पांच दवाओं में 90% से ज्यादा की कटौती की गई है। आंकड़े बताते हैं कि इस फैसले का असर कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई महंगी दवाओं पर पड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद फैसला चर्चा में

दवाओं की कीमतों को लेकर यह कदम ऐसे समय आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को NPPA से सवाल किया था कि दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण क्यों नहीं किया जा रहा है? इसके बाद कंपनियों ने संशोधित कीमतें जारी की हैं। सरकार ने 137 एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30% तक सीमित किया है। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में होने वाले मुनाफे पर अंकुश लगाना और मरीजों तक उन्हें अपेक्षाकृत कम कीमत पर पहुंचाना है।

कीट्रूडा समेत कई महंगी दवाएं अब भी महंगी

हालांकि, कीमतों में कटौती का लाभ सभी दवाओं पर नहीं मिला है। इम्यूनोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली कीट्रूडा की कीमत 2,16,500 रुपये पर बरकरार है। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रिबोसाइक्लिब की कीमत भी 24,435 रुपये ही है। इसके अलावा टैग्रिसो, टेसेंट्रिक, डार्जालेक्स और इम्फिंजी जैसी महंगी दवाओं के दामों में भी बदलाव नहीं हुआ है।

पेटेंट वाली दवाओं की कीमत घटाना चुनौती

विशेषज्ञों के सामने पेटेंट वाली दवाओं की कीमतों को कम करना एक बड़ी चुनौती है। ये दवाएं नई तकनीक और पेटेंट अधिकारों से जुड़ी होती हैं। कीमतों में कटौती होने पर कंपनियों की ओर से भारत में इनकी आपूर्ति घटाने या बंद करने की आशंका भी जताई जाती है। ऐसे में मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के साथ उनकी नियमित आपूर्ति बनाए रखना भी जरूरी होगा।
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