शिक्षा व्यवस्था को ‘बर्बादी’ की कगार पर पहुंचा दी थी पिछली सरकार : CM

शिक्षा व्यवस्था को ‘बर्बादी’ की कगार पर पहुंचा दी थी पिछली सरकार : CM
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को एक कार्यक्रम से पिछली सरकारों के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था का खस्ता हाल करने का आरोप लगाया। सीएम ने कहा कि पिछली तृणमूल और वाम मोर्चा सरकारों ने शिक्षा व्यवस्था को बर्बादी की कगार पर ले गयी। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सही समय पर लोगों ने राज्य में सत्ता परिवर्तन नहीं किया होता, तो बंगाल की संस्कृति, राष्ट्रवाद और देशभक्ति हमेशा के लिए समाप्त हो जाती। सीएम ने कहा कि मौजूदा सरकार आते ही सबसे पहले नेशनल एडुकेशन पॉलिसी लागू की। स्कूली शिक्षा में सुधार कर भारतीय संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रवादी मूल्यों को बहाल करने का प्रयास कर रही है।

योजनाबद्ध तरीके से विभाजन पैदा करने की कोशिश की गई

विवेकानंद विद्या विकास परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि पिछली सरकारों ने शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम में इस तरह बदलाव किए, जिससे राज्य की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय चेतना कमजोर हुई। छात्रों की मदद करना राज्य सरकार का कर्तव्य है, लेकिन बंगाल की स्कूली शिक्षा का पाठ्यक्रम और शिक्षा व्यवस्था 34 साल के वामपंथी शासन और 15 साल के तृणमूल शासन के दौरान बदहाल रही। अगर यह व्यवस्था कुछ और समय तक जारी रहती तो पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था और बांग्लादेश की इस्लामी शिक्षा व्यवस्था में कोई अंतर नहीं रह जाता। भाषा को विकृत करके योजनाबद्ध तरीके से विभाजन पैदा करने की कोशिश की गई। उदाहरण देते हुए सीएम ने बताया कि उस समय पाठ्यपुस्तकों में ‘माँ’ को ‘अम्मा’ या ‘आकाश’ को ‘आसमान’ के रूप में पढ़ाया जा रहा था। इतना ही नहीं, राज्य के पाठ्यक्रम से श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आत्मबलिदान के इतिहास को हटा दिया गया और सिंगूर से टाटा समूह को हटाए जाने की घटना को शामिल किया गया। किताब के पन्नों पर जेल में बंद पार्थ चटर्जी का नाम तो मौजूद था, लेकिन खुदीराम बोस या मातंगिनी हाजरा जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के नाम तलाशने में काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। सीएम ने दावा किया कि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में युवा पीढ़ी को अंग्रेजी शिक्षा और कंप्यूटर सीखने से वंचित रखा गया। उन्होंने राज्य में शिक्षक भर्ती घोटाले का भी मुद्दा उठाया और कहा कि ‘‘यह तृणमूल कांग्रेस की करतूत थी’’। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार संस्थागत भ्रष्टाचार को खत्म करेगी।

राष्ट्रविरोधी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं : जादवपुर विश्वविद्यालय में दीवारों पर नारे लिखे जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि परिसर की दीवारों पर अब भी ‘फ्री फलस्तीन’ और ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे नारे लिखे जा रहे हैं। उनकी सरकार की नीति ‘‘राष्ट्रविरोधी गतिविधियों’’ को कतई बर्दाश्त नहीं करने की है।

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