बांग्लादेश के उत्पादों के बॉयकट की तैयारी

एसीआईसी ने बांग्लादेशी उत्पादों पर जताई चिंता, व्यापारिक चिंताओं को हिंदुओं के खिलाफ हिंसा से जोड़ा
बांग्लादेश के उत्पादों के बॉयकट की तैयारी
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ईटानगरः अरुणाचल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (एसीसीआई) ने बृहस्पतिवार को भारतीय बाजारों में बांग्लादेशी उत्पादों की बढ़ती आमद पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विदेशी ब्रांड के अनियंत्रित प्रवेश से स्थानीय व्यापारियों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों और स्वदेशी उद्यमियों को खासकर संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में, नुकसान हो रहा है।

एसीआई के अध्यक्ष तारह ​​नाचंग ने बयान में कहा कि स्थानीय व्यापारियों को परिवहन एवं परिचालन लागत में काफी वृद्धि का सामना करना पड़ता है जिससे कम कीमत वाले आयातित सामानों के साथ प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने आगाह किया कि यह प्रवृत्ति स्थानीय रोजगार और पारंपरिक व्यवसायों के लिए खतरा है। साथ ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के विपरीत है।

एसीसीआई ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की खबरों पर भी चिंता व्यक्त की। खबरों का हवाला देते हुए उद्योग निकाय ने कहा कि पिछले 18 दिन में छह हिंदुओं की हत्या की गई है। इन घटनाओं को अमानवीय एवं बेहद परेशान करने वाली बताते हुए एसीसीआई ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के खिलाफ हिंसा के बावजूद भारत में बांग्लादेशी ब्रांड की बढ़ती उपस्थिति को देखकर वह स्तब्ध है।

पूरे पूर्वोत्तर में बांग्लादेशी उत्पाद की पहुंच

बयान में कहा गया कि ऐसे ब्रांड की बढ़ती बाजार उपस्थिति स्थानीय व्यापार और छोटे व्यवसायों को प्रभावित कर रही है। एसीसी ने बताया कि बांग्लादेशी कंपनियों के उत्पादों को पूर्वोत्तर सहित पूरे देश में पहुंच प्राप्त हो गई है। वैध अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग के प्रति सम्मान को दोहराते हुए उद्योग निकाय ने आगाह किया कि अनियमित या अत्यधिक बाजार पैठ स्थानीय व्यापारियों, लघु एवं मझोले उद्यमों और स्वदेशी व्यवसायों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा उत्पन्न कर रही है।

हिमालयी क्षेत्र की रणनीतिक एवं आर्थिक संवेदनशीलता पर जोर देते हुए नाचंग ने नीति निर्माताओं से व्यापार एवं बाजार पहुंच नीतियों को तैयार करते समय क्षेत्र-विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने आगाह किया दी कि विदेशी ब्रांड के उत्पादों का अनियंत्रित प्रवाह पूर्वोत्तर के नाजुक आर्थिक परिवेश को कमजोर कर सकता है।

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गौरतलब है कि भारत-बांग्लादेश के बीच 14 अरब डॉलर का ट्रेड होता है जिससे भारत को 12 अरब डॉलर का फायदा होता। भारत अधिकतर कपड़ा, मछली, जूट आदि का आयात करता है।

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