प्रथम आईलैंड बर्ड फेस्टिवल से पूर्व द्वीपों में प्री-फेस्टिवल कार्यक्रम आयोजित

14 से 17 फरवरी तक होगा मुख्य महोत्सव
प्रथम आईलैंड बर्ड फेस्टिवल से पूर्व द्वीपों में प्री-फेस्टिवल कार्यक्रम आयोजित
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31 जनवरी को द्वीपों में प्री-फेस्टिवल कार्यक्रम संपन्न

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम :  अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में प्रथम ‘आईलैंड बर्ड फेस्टिवल’ 14 से 17 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसके पूर्व 31 जनवरी को द्वीपों में प्री-फेस्टिवल कार्यक्रमों की श्रृंखला संपन्न हुई, जिसे पर्यावरण एवं वन विभाग ने अंडमान एवियन क्लब के समन्वय से आयोजित किया। ये पूर्व-कार्यक्रम निकोबार के डिगलीपुर से लेकर अंडमान के विभिन्न वन प्रभागों तक एक साथ आयोजित किए गए।

प्री-फेस्टिवल कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों, आम जनता, पंचायत प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, पक्षी प्रेमियों तथा पर्यावरण एवं वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य पक्षियों और उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना था।

कार्यक्रमों में स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और इंटरटाइडल जोन की जानकारी देने वाली निर्देशित पारिस्थितिक पदयात्राएं, ‘फीड द बर्ड्स’ स्टेशन, ‘बिल्ड-ए-नेस्ट’ चैलेंज, ‘स्केच-ए-बर्ड’ सत्र और पक्षियों पर प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। इन पहलों का उद्देश्य प्रतिभागियों में पक्षी विज्ञान के प्रति रुचि उत्पन्न करना और जैव विविधता संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था।

प्री-फेस्टिवल कार्यक्रमों को सभी आयु वर्गों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और अंडमान-निकोबार की समृद्ध पक्षी विविधता को प्रभावी रूप से प्रदर्शित किया गया। इस श्रृंखला के अगले कार्यक्रम 7 फरवरी 2026 को आयोजित किए जाएंगे।

मुख्य आईलैंड बर्ड फेस्टिवल को द्वीपों की विशिष्ट पक्षी संपदा के संरक्षण और उत्सव के रूप में महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। महोत्सव में संरक्षणवादियों, शोधकर्ताओं, पक्षी प्रेमियों और आम जनता को एक मंच पर लाया जाएगा, जिससे द्वीपों की जैव विविधता के महत्व और पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

फेस्टिवल से संबंधित कार्यक्रम विवरण, पंजीकरण और अन्य जानकारियाँ पर्यावरण एवं वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई हैं। इस पहल से न केवल पर्यावरण और पक्षियों के संरक्षण में जनता की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि द्वीप समूह में जागरूकता और उत्साहपूर्ण शिक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।

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