SIR सुनवाई में पहुंचे देव ने दस्तावेज जमा किये
कहा : चुनाव आयोग सीनियर सीटिजन के बारे में सोचे
2011 से वोट दे रहा हूं, क्या सब गलत था?
चुनाव से पहले ही क्यों शुरू हुई SIR प्रक्रिया?
सबिता, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : तृणमूल से तीन बार के सांसद और बांग्ला सुपरस्टार दीपक अधिकारी उर्फ देव बुधवार की सुबह घाटाल से यादवपुर स्थित काटजूनगर स्वर्णमयी विद्यापीठ में सुनवाई के लिए उपस्थित हुए। सांसद के अनुसार उन्होंने आवश्यक दस्तावेज जमा किए। काटजूनगर स्वर्णमयी विद्यापीठ में सुनवाई के बाद मुस्कुराते हुए देव बाहर आये और बोले, मतदान आ रहा है। यह सबका बड़ा उत्सव है। सभी दलों के नेताओं से निवेदन है कि लोगों को एक रहने का संदेश दें और ऐसा कुछ ना करें जिससे राज्य का नाम कलंकित हो। उन्होंने कहा कि मतदान जनता के लिए एक उत्सव होता है और किसी भी वैध मतदाता को इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए। राजनीति तो चलती रहेगी लेकिन चिंता मुख्य रूप से सीनियर सीटिजन के लिए है। कई लोगों ने मुझे फोन करके बताया कि बुजुर्ग और बीमार मतदाताओं को लंबी कतारों में खड़े होने में परेशानी हो रही है और कुछ लोग डरे हुए भी हैं। हालांकि हमारी उम्र के मतदाताओं को कोई समस्या नहीं है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों और बीमार लोगों को राहत प्रदान की जानी चाहिए। एक नागरिक के रूप में चुनाव आयोग से अनुरोध है कि वह 70 से अधिक उम्र वाले वरिष्ठ नागरिकों के घर पर प्रतिनिधि को भेजे। उन्होंने मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियों की सराहना की। अपने जाने-पहचाने अंदाज में मुस्कुराते हुए अभिनेता-सांसद ने आगे कहा, मैंने तस्वीरें खिंचवाई। कई लोगों को ऑटोग्राफ दिए। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य निभाया और मांगे गए सभी दस्तावेज जमा कर दिए हैं।
किसी पर दोषारोपण नहीं कर रहा हूं
सांसद ने कहा कि मैं किसी पर दोषारोपण नहीं कर रहा हूं, यह नहीं कहना चाहता कि यह आयोग की गलती है या देव की गलती। लेकिन मैं 2011 से (पश्चिम बंगाल में) वोट देता आ रहा हूं, क्या वे गलत वोट थे? राजनीति तो चलती रहेगी। लेकिन मेरी चिंता वरिष्ठ नागरिकों के लिए है। कई लोग आधे घंटे से इंतजार कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद इस बात से नाराज हैं कि चुनाव आयोग ने तीन बार के सांसद तथा अभिनेता देव को एसआईआर नोटिस जारी की है।
एसआईआर की सुनवाई में क्या कोई असुविधाएं हुईं?
सांसद ने कहा कि मैं सांसद देव अगर मैं इस पार्टी में हूं, तो वह पार्टी मुझे 'परेशान' करेगी। अगर मैं उस पार्टी में हूं, तो वह पार्टी मुझे 'परेशान' करेगी। लेकिन अगर एसआईआर होना ही था, तो पहले क्यों नहीं हुआ? यह सब (राज्य विधानसभा) चुनावों से दो-तीन महीने पहले क्यों शुरू हुआ? मतदाता सूची का गहन अध्ययन एक साल पहले क्यों शुरू नहीं हुआ? इस ठंड में वरिष्ठ नागरिकों के बारे में आयोग साेचे।