

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक पर मतदान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए सभी सांसदों से समर्थन की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी आशंकाओं और भ्रांतियों का जवाब दे दिया है और अब महिलाओं को उनका अधिकार देने का समय है।
PM मोदी ने अपने संदेश में लिखा कि दशकों से महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति होती रही है, लेकिन अब देश की आधी आबादी को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने सांसदों से “अपने विवेक से निर्णय लेने” और महिलाओं के हित में वोट करने की अपील की।
हालांकि, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस संशोधन का विरोध किया है। उनका आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण को “स्मोकस्क्रीन” बनाकर जल्दबाजी में सीमांकन (delimitation) लागू करना चाहती है, जिससे खासकर दक्षिण भारत के राज्यों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्ष का कहना है कि जनसंख्या आधारित सीमांकन से भविष्य में सीटों का संतुलन बिगड़ सकता है, जबकि सरकार का दावा है कि कुल सीटों में 50% वृद्धि होगी और राज्यों के हिस्से में कोई बदलाव नहीं होगा।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सीमांकन की प्रक्रिया में वही जल्दबाजी दिख रही है जो नोटबंदी के समय दिखी थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम “राजनीतिक नोटबंदी” साबित हो सकता है।
गौरतलब है कि महिला आरक्षण का मूल विधेयक 2023 में संसद से पास हो चुका है, लेकिन उसे जनगणना और सीमांकन से जोड़ा गया था। अब सरकार उस शर्त में बदलाव करना चाहती है, जिस पर सियासी घमासान जारी है।