

नई दिल्ली : टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी को मंदिर ले जाने को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद द्वारा उठाए गए सवालों को अब कांग्रेस का भी समर्थन मिला है। झारखंड से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खेल को हमेशा खेल भावना से देखा जाना चाहिए और किसी भी जीत को धर्म या समुदाय से जोड़ना उचित नहीं है।
सुखदेव भगत ने कहा कि कीर्ति आजाद उस ऐतिहासिक भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं जिसने देश के लिए विश्व कप जीता था और वे एक सम्मानित सांसद भी हैं। उनके द्वारा उठाए गए सवाल गंभीर हैं और उन पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भारत कोई बड़ा टूर्नामेंट जीतता है तो वह पूरे देश की जीत होती है, न कि किसी एक समुदाय, समूह या व्यक्ति की।
दरअसल, कीर्ति आजाद ने टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर और आईसीसी चेयरमैन जय शाह की आलोचना करते हुए ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में राष्ट्रीय उपलब्धि का प्रतीक किसी एक धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में कीर्ति आजाद ने कहा कि जब भारत ने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब टीम में विभिन्न धर्मों और समुदायों के खिलाड़ी शामिल थे। उन्होंने सवाल उठाया कि ट्रॉफी को केवल मंदिर ही क्यों ले जाया गया, मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे में क्यों नहीं।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव, कोच गौतम गंभीर और आईसीसी चेयरमैन जय शाह ट्रॉफी लेकर अहमदाबाद के हनुमान मंदिर पहुंचे और वहां पूजा-अर्चना की। 8 मार्च को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर तीसरी बार टी20 विश्व कप खिताब अपने नाम किया था।
अब इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और खेल तथा धर्म को लेकर नई बहस छिड़ गई है।