हांसखाली में आधी रात को पुलिस का सर्जिकल स्ट्राइक

फर्जी आधार गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
Police conduct a surgical strike in Hanskhali at midnight.
सांकेतिक फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

नदिया: पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के हंसखाली थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक अत्यंत साहसिक और खुफिया जानकारी पर आधारित ऑपरेशन के दौरान अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने एक बड़े 'आधार कार्ड जालसाजी' गिरोह को ध्वस्त कर दिया है। आधी रात को की गई इस छापामारी में पुलिस ने न केवल पहचान पत्रों के साथ खिलवाड़ करने वाले मास्टरमाइंडों को दबोचा, बल्कि उनके पास से अत्याधुनिक डिजिटल हथियारों का जखीरा भी बरामद किया है।

खुफिया इनपुट पर आधी रात को कार्रवाई

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पुख्ता जानकारी मिली थी कि हंसखाली के उलाशी अंतर्गत नगरपोटा इलाके में एक घर के भीतर अवैध पहचान पत्रों का कारखाना चलाया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस की एक विशेष टीम ने नगरपोटा निवासी हसीबुर रहमान मंडल (35) के घर पर धावा बोल दिया। इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने रंगे हाथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान हसीबुर रहमान मंडल (35), गौरव सरकार (31, निवासी पश्चिम चुनारी, हंसखाली) और दीपांकर सरकार (33, निवासी बेथुआडहरी, नकाशिपारा) के रूप में हुई है।

तकनीक का घातक दुरुपयोग और बरामदगी

गिरफ्तार आरोपी कंप्यूटर सिस्टम और विशेष सॉफ्टवेयर टूल्स के जरिए फर्जी आधार दस्तावेज तैयार कर रहे थे। ये गिरोह अवैध रूप से नाम परिवर्तन, नाबालिगों का फर्जी नामांकन और बायोमेट्रिक्स के साथ छेड़छाड़ करने में माहिर थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से:

  • दो सॉफ्टवेयर-लोडेड लैपटॉप और प्रिंटर

  • आइरिस स्कैनर (Iris Scanners) और फिंगरप्रिंट स्कैनर

  • फर्जी यूआईडीएआई (UIDAI) रसीद फॉर्म और पावती पर्चियां

  • बड़ी मात्रा में अन्य जाली डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं।

पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी की गई है ताकि साक्ष्यों की अखंडता बनी रहे और अपराधियों को सख्त सजा मिल सके।

राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता पर चोट

पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि आधार केवल एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल पहचान ढांचे की आधारशिला है। यह हमारी बैंकिंग प्रणाली, जनकल्याणकारी योजनाओं, आयकर और राष्ट्रीय सुरक्षा डेटाबेस से सीधे जुड़ा है। आधार रिकॉर्ड के साथ की गई यह छेड़छाड़ महज एक छोटा अपराध नहीं, बल्कि राज्य की संप्रभुता और देश की सुरक्षा व्यवस्था पर एक सुनियोजित हमला है।

इस प्रकार की अवैध गतिविधियों के जरिए न केवल वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराधों को अंजाम दिया जाता है, बल्कि यह अवैध घुसपैठ, छद्म वेश में पहचान छिपाने, आतंकी वित्तपोषण (Terror Financing) और संगठित अपराधों के लिए भी रास्ता खोलता है।

शून्य सहनशीलता की नीति

हंसखाली पुलिस की यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संदेश है कि पहचान के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। पुलिस अब इस गिरोह के वित्तीय लेनदेन और उनके ग्राहकों की सूची खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि अब तक कितने 'फर्जी नागरिक' इस सिंडिकेट की मदद से तैयार किए जा चुके हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन डिजिटल गवर्नेंस के युग में पहचान की शुचिता बनाए रखने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

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