PoK : बंद और प्रदर्शनों से बढ़ा तनाव, पाक सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग

रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक विरोध प्रदर्शन, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की खबर; 38 मांगों को लेकर आंदोलन तेज
PoK : बंद और प्रदर्शनों से बढ़ा तनाव, पाक सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग
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मुजफ्फराबाद : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मंगलवार को व्यापक बंद और विरोध प्रदर्शनों के बीच हालात तनावपूर्ण बने रहे। रावलकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली, भिंबर, ददयाल, पालंदरी और सुधनोति सहित कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और पाकिस्तान सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, रावलकोट में सुबह से ही प्रदर्शनकारियों ने मुख्य मार्गों पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। वहीं भिंबर से रावलकोट की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग किए जाने और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की खबरें भी सामने आई हैं। कुछ लोगों के घायल होने की भी सूचना है, हालांकि स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

कोटली, ददयाल और अन्य इलाकों में भी प्रदर्शन जारी रहे। कई शहरों में बाजार बंद रहे और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रदर्शनकारियों ने बिजली, महंगाई, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी नाराजगी जताई।

प्रदर्शन कर रहे संगठनों का कहना है कि वे कुल 38 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें सस्ती बिजली, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में राहत और क्षेत्रीय संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार जैसे मुद्दे शामिल हैं। कुछ समूहों ने स्थानीय विधानसभा में आरक्षित सीटों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।

मुजफ्फराबाद के कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की खबरें सामने आई हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया। प्रशासन की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

प्रदर्शनकारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि उनकी मांगों की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है। वहीं पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्षेत्र में जारी विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि वार्ता और समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

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