भूमि स्वामित्व अधिकार पर हाईकोर्ट में याचिका

अंडमान भूमि अधिकार पर एआईकेएस की अदालत में सुनवाई
भूमि स्वामित्व अधिकार पर हाईकोर्ट में याचिका
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस), अंडमान एवं निकोबार राज्य समिति तथा उसके अध्यक्ष डॉ. गौरांग माजी ने हाल ही में पोर्ट ब्लेयर में कलकत्ता उच्च न्यायालय की सर्किट बेंच में एक रिट याचिका दायर की है। इस याचिका के माध्यम से भारत सरकार और अंडमान एवं निकोबार प्रशासन को निर्देश देने की प्रार्थना की गई है कि द्वीपसमूह के भूमि धारकों को भूमि पर पूर्ण स्वामित्व अधिकार प्रदान किया जाए। याचिकाकर्ता ऑल इंडिया किसान सभा और उसके अध्यक्ष डॉ. गौरांग माजी ने रिट याचिका में उल्लेख किया है कि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह भूमि राजस्व एवं भूमि सुधार विनियम, 1966 की धारा 38 के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की समस्त भूमि पूर्णतः सरकार में निहित है और कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार के कब्जे, परंपरा, हस्तांतरण अथवा किसी अन्य माध्यम से उस पर कोई अधिकार अर्जित नहीं कर सकता, जब तक कि सरकार या उसके अधिकार के अंतर्गत निष्पादित कोई वैध हस्तांतरण न हो। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि उक्त विनियम की धारा 159 के अनुसार द्वीपों की भूमि से संबंधित अंतिम निर्णय सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। ऑल इंडिया किसान सभा ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा आवंटित भूमि का पूर्ण विक्रय किसी भी परिस्थिति में संभव नहीं है। वर्ष 1966 के विनियम के तहत सरकार ही भूमि की पूर्ण स्वामी है और भूमि विक्रय के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, जिसकी प्रक्रिया अत्यंत कठोर है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि स्वतंत्रता के 78 वर्ष बीत जाने के बावजूद इन द्वीपों के नागरिक संपत्ति के अधिकार से वंचित हैं, जबकि यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300(ए) के अंतर्गत सुनिश्चित है। एआईकेएस ने उच्च न्यायालय से प्रार्थना की है कि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह भूमि राजस्व एवं भूमि सुधार विनियम, 1966 की धारा 38 तथा धारा 159(2) को अल्ट्रा वायर्स घोषित किया जाए। उच्च न्यायालय ने रिट याचिका को स्वीकार करते हुए भारत संघ एवं अंडमान एवं निकोबार प्रशासन को चार सप्ताह के भीतर प्रतिवाद में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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