

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
घोला: चुनाव आयोग के तमाम दावों और मानवीय दिशा-निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों की संवेदनहीनता का एक विचलित करने वाला उदाहरण घोला के तेघरिया हाई स्कूल स्थित सुनवाई केंद्र में देखने को मिला। आयोग ने स्पष्ट आदेश दिया था कि 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध और शारीरिक रूप से अक्षम मतदाताओं को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है; ईआरओ (ERO) और बीएलओ (BLO) स्वयं उनके घर जाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेंगे। लेकिन इन निर्देशों को ठेंगे पर रखते हुए घोला में अधिकारियों ने तानाशाही रवैया अपनाया, जिसके कारण एक 93 वर्षीया बिस्तर पर पड़ी वृद्धा को खटिया पर लादकर केंद्र तक लाना पड़ा।
घटना के अनुसार, घोला पश्चिम तेघरिया निवासी राबिया बीबी (93) लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार और पूरी तरह शय्याशायी हैं। उनके परिजनों ने अधिकारियों को उनकी स्थिति से अवगत कराया था, लेकिन संवेदनहीन ईआरओ और बीएलओ ने आयोग के 'होम विजिट' के नियम को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। मजबूरन, भीषण गर्मी और बीमारी की हालत में ग्रामीणों और परिजनों ने वृद्धा को एक खटिया पर लिटाया और उसे अपने कंधों पर उठाकर सुनवाई केंद्र तक पहुँचाया। लोकतंत्र के इस उत्सव में एक बुजुर्ग महिला की यह बेबसी देख वहां मौजूद हर शख्स की आँखें नम हो गईं।
जैसे ही राबिया बीबी को खटिया पर केंद्र लाया गया, वहां उपस्थित अन्य मतदाताओं का धैर्य जवाब दे गया। प्रशासनिक अधिकारियों की इस घोर लापरवाही और क्रूरता को देख लोग भड़क उठे। उत्तेजित भीड़ ने ईआरओ को घेर लिया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का आरोप था कि जब चुनाव आयोग ने स्पष्ट नियम बनाए हैं, तो स्थानीय अधिकारी अपनी सुख-सुविधा के लिए बुजुर्गों को इस तरह प्रताड़ित क्यों कर रहे हैं? काफी देर तक सुनवाई केंद्र पर कामकाज ठप रहा और हंगामे की स्थिति बनी रही।
इस पूरे घटनाक्रम ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब मौके पर पहुँचे मीडियाकर्मियों ने ईआरओ से उनकी लापरवाही पर सवाल किए। अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय अधिकारी ने कैमरे के सामने ही अपना आपा खो दिया और मीडियाकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार और बदसलूकी की।
इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए इसे चुनाव आयोग और स्थानीय चुनाव अधिकारियों की बड़ी विफलता बताया है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि एक तरफ आयोग बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए समावेशी मतदान की बात करता है, और दूसरी तरफ उसके अधिकारी बुजुर्गों का अपमान कर रहे हैं। फिलहाल, इस शर्मनाक घटना को लेकर पूरे घोला इलाके में भारी तनाव और नाराजगी व्याप्त है। स्थानीय निवासियों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।