

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : एक संदिग्ध 'डिलीवरी बॉय' जिसे लोग चोर समझ रहे थे, असल में अपने परिवार से बिछड़ा हुआ एक बेसहारा युवक निकला। कूचबिहार के उत्तरपाड़ा मोड़ के युवाओं की सतर्कता और बहरामपुर पुलिस की संवेदनशीलता ने मालबाजार के चाय बागान के एक आदिवासी युवक को नया जीवन दिया है।
घटना की शुरुआत कूचबिहार में हुई, जहाँ एक युवक जोमैटो डिलीवरी बॉय के वेश में गलियों में भटक रहा था। उसे पैदल और परेशान हाल में देखकर स्थानीय लड़कों को संदेह हुआ। जब उसे रोककर पूछताछ की गई, तो वह घबरा गया। स्थानीय लोगों ने जब गौर से देखा, तो उसके हाथ-पैर गंदे थे और वह मानसिक रूप से विक्षिप्त लग रहा था। लोगों ने उसे बहरामपुर थाने पहुँचाया।
बहरामपुर थाने के आईसी सुदीप सिंह ने युवक की हालत देखकर तुरंत वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब (हैम रेडियो) से संपर्क किया। हॅम रेडियो के सदस्यों ने कड़ी मशक्कत के बाद युवक की पहचान साहिल उरांव के रूप में की, जो जलपाईगुड़ी जिले के मालबाजार स्थित लीदाम चाय बागान का रहने वाला है। साहिल के पिता कर्मा उরাंव बीमार हैं और मां बासनी व भाई समीर चाय बागान में श्रमिक हैं।
मालबाजार के एसडीओ और बीडीओ के हस्तक्षेप के बाद स्थानीय पंचायत प्रधान अशोक कुमार चिकबड़ाई को जिम्मेदारी सौंपी गई। थाने में रखे गए साहिल को जब वीडियो कॉल के जरिए उसके माता-पिता से मिलवाया गया, तो सबकी आंखें नम हो गईं। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बहरामपुर थाने के बड़े बाबू (आईसी) ने खुद वापसी की टिकट और आर्थिक सहायता का जिम्मा उठाया।
इस सुखद अंत के बीच, प्रशासन ने रांगामति पंचायत प्रधान से एक विशेष अनुरोध किया है। उनसे कहा गया है कि साहिल जैसे अन्य मानसिक रूप से कमजोर लोगों के हाथ पर स्थायी रूप से (टैटू के जरिए) उनका नाम और मोबाइल नंबर लिखवा दिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति होने पर उन्हें आसानी से घर पहुँचाया जा सके। साहিল अब अपने भाई समीर के साथ सुरक्षित घर लौट गया है।