

नयी दिल्ली : संसद में गुरुवार को भी लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण गंभीर रूप से प्रभावित रही। अयोध्या के राम मंदिर में ‘चढ़ावा चोरी’ और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी तथा अन्य विपक्षी दलों ने दोनों सदनों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष की प्रमुख मांग थी कि गृहमंत्री अमित शाह इन मुद्दों पर संसद में बयान दें। लगातार नारेबाजी और व्यवधान के कारण लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर तक और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी जबकि राज्यसभा की बैठक भी कई बार स्थगित हुई। यही नहीं विपक्ष ने गृहमंत्री के बयान की मांग करते हुए उच्च सदन से बहिर्गमन भी किया।
लोस में नहीं चल पाये प्रश्नकाल और शून्यकाल
लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत में अध्यक्ष ओम बिरला ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम हमले की बरसी पर पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। समाजवादी पार्टी के सदस्य अयोध्या में राम मंदिर के ‘चढ़ावा चोरी’ का मुद्दा उठा रहे थे। जबकि कांग्रेस सांसद दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के संबंध में गृहमंत्री के बयान की मांग कर रहे थे। अध्यक्ष बिरला ने विपक्ष से प्रश्नकाल चलने देने और सदन की गरिमा बनाये रखने की अपील की लेकिन हंगामा जारी रहने पर सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। मानसून सत्र की शुरुआत से अब तक लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल सुचारु रूप से नहीं चल पाये हैं।
‘कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026’ ध्वनिमत से पारित
बैठक दोबारा शुरू होने पर भी स्थिति नहीं बदली। विपक्षी सदस्य आसन के समीप पहुंचकर नारेबाजी करते रहे। इसी बीच वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया। विपक्ष के हंगामे के कारण इस विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी, लेकिन सरकार ने इसे ध्वनिमत से पारित करा लिया। विपक्ष द्वारा लाये गये सांविधिक संकल्प और संशोधन भी खारिज कर दिये गये।
राज्यसभा में रीजीजू और खरगे के बीच तीखी नोकझोंक
राज्यसभा में भी लगभग यही स्थिति रही। सभापति सी पी राधाकृष्णन और बाद में उपसभापति हरिवंश ने विपक्ष से व्यवस्था बनाये रखने की अपील की। लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने गृहमंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर जोर बनाये रखा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रीजीजू ने विपक्ष के रवैये पर आपत्ति जतायी। उच्च सदन में किरेन रीजीजू और मल्लिकार्जुन खरगे के बीच संसदीय नियमों को लेकर भी तीखी बहस हुई। रीजीजू द्वारा कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा पर की गयी टिप्पणी का जवाब देते हुए खरगे ने कहा कि उन्हें संसदीय नियम सिखाने की आवश्यकता नहीं है। खरगे ने कहा कि विपक्ष क्या तथा कब बोलेगा, यह उसका अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के सदस्यों का अपमान कर रही है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।
उच्च सदन ने पास किया विनियोग विधेयक
लगातार व्यवधानों के बीच संसद ने विनियोग (संख्यांक-3) विधेयक को भी मंजूरी दे दी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि यह विधेयक वित्त वर्ष 2022-23 में हुए अतिरिक्त सरकारी व्यय को वैधानिक स्वीकृति देने के लिए लाया गया है। इस पर संक्षिप्त चर्चा के दौरानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त व्यय की मंजूरी लोक लेखा समिति की सिफारिश के आधार पर मांगी गयी है। इसके बाद विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा के दौरान कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृहमंत्री के बयान की मांग करते हुए सदन से बहिर्गमन भी किया।