पानीहाटी: निजी स्कूल में बैठकर BLO द्वारा SIR फॉर्म वितरण का आरोप

TMC कार्यकर्ताओं पर तस्वीरें लेने से रोकने का आरोप
Panihati: BLO accused of distributing SIR forms while sitting in a private school
सांकेतिक फोटो
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नि​धि, सन्मार्ग संवाददाता

पानीहाटी: पानीहाटी नगरपालिका के 18 नंबर वार्ड में एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है, जहाँ बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) पर चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए एक निजी स्कूल के अंदर बैठकर एसआईआर (SIR - Summary Revision) फॉर्म वितरित करने का आरोप लगा है। बीएलओ पलाश सरदार पर यह आरोप है कि घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करने के अनिवार्य नियम की अनदेखी करते हुए वे 99 पार्ट से संबंधित फॉर्म एक निजी स्कूल में बैठकर बाँट रहे थे।

इस अनियमितता की जानकारी मिलते ही विपक्षी दलों के कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे। बीजेपी नेता जॉय साहा और सीपीएम के चारण चक्रवर्ती सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने इस घटना की तस्वीरें खींचनी चाहीं, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। विपक्षी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उन्हें ऐसा करने से जबरन रोका और धमकी भी दी।

विपक्षी नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई है। बीजेपी और सीपीएम के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन करते हुए एक निजी स्कूल जैसी अनौपचारिक जगह पर बैठकर एक बीएलओ कैसे फॉर्म वितरित कर सकता है। उन्होंने इसे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाला कदम बताते हुए, मामले की उच्च स्तरीय जाँच की माँग की है। विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस गंभीर मामले की शिकायत जल्द ही चुनाव आयोग में दर्ज कराएंगे।

बीएलओ पलाश सरदार ने किया अपना बचाव

वहीं, आरोपों के घेरे में आए बीएलओ पलाश सरदार ने अपना बचाव करते हुए कहा कि वे घर-घर जाकर फॉर्म वितरित कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने काम में सुविधा के लिए और आसपास के लोगों के फॉर्म जमा करने की बात पर एक जगह बैठना उचित समझा। उन्होंने दावा किया कि वे इस काम को निर्धारित समय पर खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं और उनके काम में कोई गड़बड़ी नहीं है। दूसरी ओर, स्थानीय पार्षद पूजा चौधरी ने भी बीएलओ का बचाव किया और कहा कि उन्होंने कोई अनियमितता नहीं की है। हालाँकि, तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर तस्वीरें लेने से रोके जाने के मुद्दे पर बीएलओ या पार्षद की ओर से कोई स्पष्टीकरण या सफाई नहीं दी गई है। यह घटना स्थानीय राजनीतिक गलियारों में गरमाहट पैदा कर रही है और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर रही है।

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