पद्मश्री से बढ़ा दायित्व : पंडित तरुण भट्टाचार्य

युवा पीढ़ी शास्त्रीय संगीत से जुड़े तो दुनिया से मिट सकती है अशांति
पद्मश्री से बढ़ा दायित्व : पंडित तरुण भट्टाचार्य
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सबिता राय, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की सूची गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले घोषित की गई। इस वर्ष 131 पुरस्कार पाने वाले लोगों में से कुल 11 लोग बंगाल से हैं। इनमें से एक हैं विश्वविख्यात संतूर वादक पंडित तरुण भट्टाचार्य। कला के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण याेगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। सन्मार्ग ने तरुण भट्टाचार्य से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि क़िसी भी कलाकार के लिए अवॉर्ड एक प्रेरणा होता है। इससे दायित्व और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि पद्मश्री मिलने के बाद वे अपने क्षेत्र संतूर में और अधिक मनोयोग से अभ्यास करेंगे। उनकी कोशिश रहेगी कि उनकी प्रस्तुतियां अधिक से अधिक श्रोताओं के दिलों तक पहुंचें।

सीखते सीखते संगीत रग रग में बस गया

मात्र 4 साल से पद्मश्री तक का सफर आसान नहीं रहा लेकिन कड़ी मेहनत रंग लायी। उन्होंने बताया कि बहुत कम उम्र में संगीत साधना आरंभ की थी। पिता के कहने पर उन्होंने कला की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने कहा, पिताजी ने मुझे जबरन संगीत के मार्ग पर डाला था। शुरुआत में मैं सीखना नहीं चाहता था, लेकिन उनके कहने पर संतूर की साधना शुरू की। धीरे-धीरे अभ्यास करते हुए संगीत मेरी रग-रग में बस गया। अभी मेरी उम्र 67 वर्ष है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शास्त्रीय संगीत के प्रति प्रेम कितना गहरा और समर्पित रहा है।

क्यों सुनना चाहिए युवा पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत

शास्त्रीय संगीत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इसमें ऐसी शक्ति होती है, जो मनुष्य के भीतर की सकारात्मकता को जाग्रत करती है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे शास्त्रीय संगीत सीखें। यदि किसी कारणवश सीखना संभव न हो, तो कम से कम इसे नियमित रूप से सुनें। आज डिजिटल युग में शास्त्रीय संगीत हर जगह आसानी से उपलब्ध है। नियमित रूप से शास्त्रीय संगीत सुनने से इससे लगाव और जुड़ाव दोनों हो जायेगा। एक बार जब व्यक्ति संगीत से जुड़ जाता है, तो वह अशांति और दुख से दूर रहता है। उन्होंने कहा, हमने कभी नहीं सुना कि दो कलाकार आपस में झगड़ रहे हों। यदि हर व्यक्ति इसी भावना के साथ आगे बढ़े, तो दुनिया से हर प्रकार की अशांति समाप्त हो सकती है। उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हर कोई म्युजिशियन बने क्योंकि अगर हर कोई म्युजिशियन बन जायेगा तो डॉक्टर इंजीनियर कौन बनेगा। मैं यह कह रहा हूं कि म्युजिकल यानि संगीतमय बने। इससे साकारात्मक एनर्जी मिलती है।

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