

कोलकाता : जादवपुर विश्वविद्यालय में पिछले दो दिनों से जारी हिंसा अब छात्र राजनीति से आगे बढ़कर राष्ट्रवाद और राजनीतिक असहमति की बहस में बदल गयी है। भाजपा नेता व राज्य मंत्री दिलीप घोष की कथित ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ वाली टिप्पणी को लेकर विश्वविद्यालय के शिक्षकों में रोष है। शिक्षकों का सवाल है कि जिस संस्थान के विभाग और सैकड़ों पूर्व छात्र देश की रक्षा व्यवस्था व महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों में योगदान दे रहे हैं, उसे ‘देशद्रोही’ बताने का आधार आखिर क्या है?
प्रो. राजेश्वर सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित इस संस्थान के प्रति ऐसी संकीर्ण मानसिकता अपमानजनक व निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि JU के मैकेनिकल, सिविल, मेटलर्जी, केमिकल इंजीनियरिंग और फिजिक्स समेत छह से ज्यादा विभाग रक्षा मंत्रालय, DRDO तथा विज्ञान एवं तकनीक से जुड़े कार्यों में योगदान दे रहे हैं। विश्वविद्यालय के सैकड़ों पूर्व छात्र रक्षा तकनीक के साथ PMO, विदेश मंत्रालय और अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में पूरे विश्वविद्यालय को राष्ट्रविरोधी बताना उसकी राष्ट्रीय भूमिका को नजरअंदाज करना है।
प्रो. देवोत्तम बसु ने कहा कि पिछले दो दिनों में बाहरी लोगों का कैंपस में प्रवेश, छात्रों को धमकाना और उत्पात मचाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल व सरकार को राष्ट्र निर्माण में जेयू के योगदान को समझना चाहिए। देश के विकास को लेकर चिंतित रहना ही वास्तविक राष्ट्रवाद है। वहीं, हिंसा के खिलाफ आंदोलनरत प्रो. सुदक्षिणा बनर्जी ने कहा कि सरकार का विरोध, देश का विरोध नहीं है।
दोनों को अलग-अलग रखना जरूरी है। जेयू के छात्र और शिक्षक आतंकवादी या दुश्मन नहीं हैं, जिन पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की जाए। उन्होंने छात्रों पर बाहरी लोगों के कथित हमले की कड़ी निंदा करते हुए जांच की मांग की। दिलचस्प बात यह है कि जेयू विवाद अब इस बुनियादी सवाल पर आकर टिक गया है कि राष्ट्रवाद की पहचान राजनीतिक समर्थन से होगी या देश के प्रति वास्तविक योगदान से।