बंदरों के आतंक से संतरे की फसल बर्बाद

बंदरों के आतंक से संतरे की फसल बर्बाद
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जलपाईगुड़ी : पेड़ों पर संतरे पककर तैयार हैं। फसल भी अच्छी हुई है और मौसम ने भी किसानों का साथ दिया है। ऐसे में अच्छी कमाई की उम्मीद लगाए बैठे कालिम्पोंग जिले के गोरुबथान ब्लॉक के सामसिंग क्षेत्र के संतरा उत्पादकों की चिंता बढ़ गई है। बंदरों के झुंड बागानों में घुसकर पके संतरे खा रहे हैं और डालियां हिलाकर कच्चे फलों को जमीन पर गिरा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इस उत्पात से सैकड़ों बीघा जमीन पर लगी संतरे की फसल को भारी नुकसान हुआ है।

किसानों के अनुसार, सामसिंग ग्राम पंचायत के लोअर घुमटी, भालूखोप, अपर घुमटी, खोलागांव, भुजेल गांव और गुम्बा डारा समेत करीब 25 गांवों में बंदरों का आतंक बढ़ गया है। सैकड़ों बंदर अलग-अलग झुंडों में बागानों पर हमला कर रहे हैं। इससे न केवल फल नष्ट हो रहे हैं, बल्कि कई जगह पेड़ों की डालियां भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। किसानों को आशंका है कि इसका असर आने वाले समय की पैदावार पर भी पड़ सकता है।

सामसिंग में संतरे की खेती कई परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। अच्छी फसल होने पर किसान स्थानीय बाजारों के साथ दूसरे बाजारों में भी संतरे बेचकर कमाई करते हैं। लेकिन इस बार बंदरों के लगातार हमलों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसानों का कहना है कि नुकसान इसी तरह जारी रहा, तो उनके लिए बागानों की देखभाल करना और नए पौधे लगाना मुश्किल हो जाएगा।

लोअर बस्ती के संतरा उत्पादक रमेश छेत्री ने बताया, “पिछले साल भी बंदरों के कारण नुकसान हुआ था, लेकिन कुछ संतरे बेच पाए थे। इस बार हमले में अधिकांश फल नष्ट हो गए हैं। पेड़ों पर बेचने लायक संतरे लगभग नहीं बचे हैं।”

एक अन्य किसान गणेश राय ने कहा कि इस बार उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उनके अनुसार, वन विभाग को शिकायत देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

कालिम्पोंग वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बंदरों को रोकने का कोई निश्चित उपाय उनके पास नहीं है। वहीं, उद्यान पालन विभाग के सहायक निदेशक खुर्शीद आलम ने कहा कि सामसिंग में जैविक तरीके से उन्नत किस्म के संतरे उगाए जाते हैं। उन्होंने बंदरों से फसल को नुकसान पहुंचने की जानकारी मिलने की बात कही और बताया कि अगले वर्ष से किसानों को फसल बीमा का लाभ दिया जा सकता है या नहीं, इस पर विचार किया जा रहा है।

किसानों ने प्रशासन से बंदरों के उत्पात को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो सामसिंग की पारंपरिक संतरा खेती का भविष्य संकट में पड़ सकता है।

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