

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने विधानसभा में मंगलवार को बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर पिछली सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने विभाग का कार्यभार संभाला तो पाया कि उच्च शिक्षा व्यवस्था बेहद बदहाल स्थिति है। यूं कहे तो व्यवस्थाओं में दीमक लगे हुए थे। मंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने 31 विश्वविद्यालय स्थापित करने के दावे तो किए, लेकिन उनकी वास्तविक स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने विधानसभा में करीब नौ विश्वविद्यालयों का उदाहरण दिया, जहां कहीं केवल 39 छात्र नामांकित हैं, तो कहीं विश्वविद्यालय तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है और दक्षिण दिनाजपुर विश्वविद्यालय का तो अपना भवन भी नहीं है। वह किराये के भवन में चल रहा है और हर 6 महीने में उसका पता बदल जाता है। हावड़ा के हिन्दी विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि वहां 178 स्टूडेंट्स हैं।
चट्टोपाध्याय ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर बंगाल में राजनीतिक कारणों से विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई। उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात है कि 20 कि.मी. की दूरी पर दो विश्वविद्यालय बनाए गए, जबकि उनकी आवश्यकता और संसाधनों का समुचित आकलन नहीं किया गया। कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी मंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि 30–35 प्रतिशत अंक लेकर पिछले दरवाजे से कॉलेजों में पढ़ाने की व्यवस्था अब स्वीकार नहीं की जाएगी। नियुक्तियों में योग्यता, पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो शिक्षक और कर्मचारी वेतन या अन्य वैधानिक सुविधाओं के हकदार हैं, उन्हें उनके सभी अधिकार और सुविधाएं नियमानुसार उपलब्ध कराई जाएंगी।
उन्होंने कई कॉलेज यूनियन रूम के हाल के हालातों का भी विधान सभा में जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यूनियन रूम की क्या व्यवस्था थी, कॉलेज की तरफ़ से हमें चिट्ठी देकर पूरी रिपोर्ट भेजी गई। कॉलेज यूनियन रूम से कहीं शराब की बोतलें पाई गईं तो कहीं कटारी- हुक्का पाया गया और कई आपत्तिजनक चीजें भी पायी गयीं। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि अब बंगाल के शिक्षा के गौरव को लौटाना है।