स्कूल में नहीं पर हाजिरी में 'प्रेजेंट'

पार्षद के सरप्राइज विजिट में खुली प्रधान अध्यापिका की पोल !
Not present in school, but marked as 'present' in the attendance register; the headmistress's deception was exposed during the councillor's surprise visit!
सांकेतिक फोटो REP
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बनगांव : उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव नगरपालिका क्षेत्र स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब स्थानीय पार्षद ने स्कूल का औचक निरीक्षण (Surprise Visit) किया। यहाँ जो नजारा दिखा, उसने न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि भ्रष्टाचार के एक नए स्वरूप को भी उजागर किया। चंपाबेरिया कॉलोनी नंबर 2 जीएसएफपी स्कूल की प्रधान अध्यापिका सौमी मंडल पर आरोप है कि वे स्कूल आए बिना ही उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर रही हैं।

पार्षद की दबिश, उड़ गए होश

बनगाँव नगरपालिका के पार्षद प्रसेनजीत विश्वास को पिछले काफी समय से विद्यालय की अव्यवस्था और प्रधान अध्यापिका की मनमानी की शिकायतें मिल रही थीं। शुक्रवार को जब वे वास्तविकता जानने स्कूल पहुँचे, तो उनकी आँखें फटी रह गई। पार्षद ने देखा कि प्रधान अध्यापिका स्कूल में मौजूद नहीं थीं, लेकिन उपस्थिति रजिस्टर (Attendance Register) में उनके नाम के आगे हस्ताक्षर मौजूद थे। यानी कागजों पर वे 'हाजिर' थीं, लेकिन असल में स्कूल से 'गायब'।

मानसिक प्रताड़ना और स्थानांतरण का विवाद

पार्षद प्रसेनजीत विश्वास ने मीडिया को बताया, "सौमी मंडल ने दो साल पहले यहाँ कार्यभार संभाला था, तभी से उनकी कार्यशैली विवादों में है। मिली जानकारी के अनुसार, उनका तबादला (Transfer) यहाँ से हो चुका है, लेकिन वे इसके बावजूद कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इतना ही नहीं, स्कूल के अन्य शिक्षकों पर वे लगातार मानसिक दबाव बनाती हैं, जिससे स्कूल का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह दूषित हो चुका है।"

अभिभावकों का फूटा गुस्सा, शिक्षकों ने साधी चुप्पी

स्कूल में मौजूद एक अभिभावक ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, "प्रधान अध्यापिका कभी समय पर स्कूल नहीं आतीं। जरूरी दस्तावेजों के लिए हमें हफ्तों तक चक्कर काटने पड़ते हैं। अगर हम सवाल करते हैं, तो वे दुर्व्यवहार करने लगती हैं।"

वहीं, स्कूल के शिक्षक जयदेव राय की बातों ने मामले को और पुख्ता कर दिया। उन्होंने बताया कि प्रधान अध्यापिका आज छुट्टी पर थीं, लेकिन रजिस्टर पर उनके हस्ताक्षर कैसे आए, यह रहस्य का विषय है। उन्होंने दबी जुबान में स्वीकार किया कि रजिस्टर पर हस्ताक्षर पहले ही कर दिए गए थे या कब हुए, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।

कार्यवाही की मांग

पार्षद प्रसेनजीत विश्वास ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली इस प्रधान अध्यापिका के खिलाफ तत्काल कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

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