

कोलकाता : SIR के मद्देनजर आम लोगों तक और अधिक पहुंचने की रणनीति के तहत आगामी चुनाव से पहले किन मुद्दों पर तृणमूल पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को ध्यान देना चाहिए, इसे लेकर तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने राज्यभर के एक लाख से अधिक नेता और बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के साथ वर्चुअल बैठक की और कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार शनिवार की बैठक में अभिषेक ने कहा, हमारी यह लड़ाई छह महीने की है, जिसमें से तीन महीने बीत चुके हैं। हमारे हाथ में अब 100 दिन हैं। SIR का काम अधिकतम एक महीने चलेगा। अगर 16 तारीख को अंतिम सूची निकलती है तो हमारे पास केवल 22 दिन होंगे। इन्हीं 22 दिनों में हमें सबसे मजबूत लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने SIR के मद्देनज़र बूथ-स्तर पर 'वोट रक्षा समितियां' बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हर समिति में संगठन का एक प्रतिनिधि होगा और जिन लोगों के नाम 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' की सूची में आए हैं, उनके पास जाना होगा। उन्होंने कहा, 'एक भी मामला छूटना नहीं चाहिए। 1.36 करोड़ प्रभावित लोगों और 32 लाख अनमैप्ड मतदाताओं तक घर-घर पहुंचना होगा। सारी जानकारी 'दीदीर दूत' ऐप पर अपलोड करनी होगी और जिला अध्यक्ष, जिला चेयरमैन व सांसद हर पांच दिन में इसकी समीक्षा करेंगे।' उन्होंने सांसदों और विधायकों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जरूरत पड़े तो सांसद अपन जेब से पैसा खर्च कर वॉर-रूम शुरू करें। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों की बात को मान्यता दी है और फॉर्म-7 को लेकर आयोग की साजिश को तृणमूल ने पकड़ा है, जो अन्य राज्यों में नहीं पकड़ी जा सकी। अभिषेक ने आरोप लगाया कि कई जगह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी की नोटिस नहीं लगायी गयी और सुनवाई के समय BLA-2 को मौजूद रहने नहीं दिया गया। बैठक में उन्होंने कहा कि SIR एक 'अपरिकल्पित प्रक्रिया' है, जिसके कारण अब तक 126 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके खिलाफ तृणमूल का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने यह भी दावा किया कि 1.36 करोड़ मामलों में विसंगतियां हैं और अमर्त्य सेन, क्रिकेटर मोहम्मद शमी तथा नेताजी सुभाषचंद्र बोस के परिवार के सदस्य भी इससे प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।
आज राज्यभर में तृणमूल का विरोध मार्च
रविवार यानी 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस है। उसी दिन मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए तृणमूल कार्यकर्ताओं और समर्थकों को ब्लॉक-स्तर पर विरोध रैलियां निकालने का निर्देश अभिषेक बनर्जी ने दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली से लगातार वंचना के बावजूद तृणमूल ने आत्मनिर्भर बंगाल बनाकर दिखाया है। उन्होंने कहा, 'इसीलिए हम कहते हैं—चाहे जितना हमला करो, बंगाल फिर जीतेगा।' उन्होंने यह भी बताया कि रविवार को विरोध रैलियों के साथ-साथ तृणमूल का प्रतिनिधिमंडल दोबारा चुनाव आयोग के कार्यालय जाएगा और मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करेगा।