चाय बागानों में वेतन और अधिकार का संकट

चाय बागान मजदूरों के मुद्दे पर शुभेंदु अधिकारी का हमला चाय बागान मजदूरों के मामले में सरकार विफल बीजेपी ने तृणमूल सरकार पर बोला हमला

चाय बागानों में वेतन और अधिकार का संकट
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केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में चाय बागान मजदूरों की बदहाल स्थिति, वन अधिकार अधिनियम, वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल के सैकड़ों चाय बागानों में मजदूरों को महीनों से वेतन नहीं मिला है और सरकार आंखें मूंदे बैठी है। संवाददाता सम्मेलन में अलीपुरदुआर के सांसद मनोज तिग्गा और उत्तर बंगाल के कई विधायक मौजूद थे।

100 से अधिक चाय बागानों में वेतन संकट

शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि अलीपुरदुआर और जलपाईगुड़ी जिलों के 100 से अधिक चाय बागानों में मजदूरों को 5 महीने से ज्यादा समय से मजदूरी नहीं दी गई है। करीब 5 लाख श्रमिक इस संकट से प्रभावित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार 15–30% चाय बागान की जमीन को व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति देकर चाय उद्योग को खत्म करने की साजिश कर रही है।

पीएफ घोटाला और कानूनी कार्रवाई का अभाव

तिग्गा ने कहा कि करीब 300 आपराधिक मामले उन चाय बागान मालिकों के खिलाफ दर्ज हैं जो मजदूरों का पीएफ काटने के बावजूद जमा नहीं कर रहे। यह एक गंभीर आपराधिक मामला है, लेकिन अब तक पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक भी मालिक को गिरफ्तार नहीं किया है। यह सिलसिला 2015 के बाद तेजी से बढ़ा है।

वन अधिकार अधिनियम लागू नहीं करने का आरोप

शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि 2006 का वन अधिकार अधिनियम पश्चिम बंगाल में लागू नहीं किया गया है, जबकि चाय बागान मजदूर इसके पात्र हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरों को पट्टे और किरायेदारी के नाम पर उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

वोटर लिस्ट संशोधन और मजदूरों का डर

उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की कमी के कारण चाय बागान मजदूरों के नाम वोटर लिस्ट से हटने का खतरा है। बीजेपी ने मांग की है कि वन अधिकार अधिनियम के तहत जारी दस्तावेजों को वैध माना जाए।

केंद्र की राशि का उपयोग नहीं

शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2022 में चाय बागान मजदूरों के कल्याण के लिए 10,000 करोड़ रुपये की घोषणा की थी, लेकिन राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव नहीं भेजने के कारण 4,000 करोड़ रुपये अब भी खर्च नहीं हो सके हैं।

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