

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कालीघाट तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद के खिलाफ दायर मामले में छह माह तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती है। उन्हें छह माह तक के लिए सुरक्षा कवच मिल गया। उन्हें जांच में सहयोग करना पड़ेगा। कीर्ति आजाद को इस मामले के आईओ के समक्ष पूछताछ के लिए 22 सितंबर को हाजिर होना पड़ेगा। उनकी तरफ से दायर मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस कौशिक चंद ने यह आदेश दिया।
कीर्ति आजाद और उनके सहयोगियों के खिलाफ रानीगंज थाने में इसी साल अगस्त में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि कीर्ति आजाद के रानीगंज के बंगले में एक व्यापारी को बुलाया गया था। उससे 15 लाख रुपए की मांग की गई थी और कहा था कि अगर नहीं दोगे तो कारोबार बंद हो जाएगा। यह घटना 2025 में 21 मई को घटी थी। कीर्ति आजाद के साथ बातचीत की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी की गई थी। इसे कोर्ट में बजाकर सुनाया भी गया। जस्टिस चंद ने कहा कि इससे इस घटना के पक्ष में कोई प्रमाण नहीं मिलता है। कीर्ति आजाद के एडवोकेट ने कहा कि यह एक साजिश है। उन्होंने कहा कि कीर्ति आजाद ने 2025 में कोयला माफिया के खिलाफ केंद्र सरकार के कोयला और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को एक पत्र लिखा था। इसमें यहां के गैस सिंडिकेट का भी जिक्र था। सत्ता परिवर्तन के बाद इसका बदला लेने के लिए उनके खिलाफ यह साजिश रची गई है। जस्टिस चंद ने अपने आदेश में कहा है कि कीर्ति आजाद को जांच में सहयोग करना पड़ेगा। इस मामले की जांच कर रही सीआईडी के मुख्यालय भवानी भवन से अगर उन्हें दोबारा तलब किया जाता है तो उन्हें जाना पड़ेगा। इसके लिए सात दिन पहले से नोटिस देनी पड़ेगी। कीर्ति आजाद ने इसी मामले में अग्रिम जमानत के लिए एक याचिका भी दायर कर रखी है। इसकी सुनवाई जस्टिस तीर्थंकर घोष के कोर्ट में होनी है।