उच्च शिक्षा में निजी भागीदारी का विरोध नहीं लेकिन...

शिक्षा को बिकाऊ वस्तु नहीं बनने देंगे : उच्च शिक्षा मंत्री
उच्च शिक्षा में निजी भागीदारी का विरोध नहीं लेकिन...
Published on

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में निजी भागीदारी के खिलाफ नहीं है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शिक्षा कोई बिकाऊ वस्तु न बने। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र द्वारा घोषित पांच ‘यूनिवर्सिटी टाउनशिप’ में से एक पश्चिम बंगाल को दिलाने की कोशिश कर रही है।उच्च शिक्षा विभाग के लिए वर्ष 2026-27 का 7,168 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान पेश करते हुए चट्टोपाध्याय ने कहा कि राज्य सरकार देश के अन्य हिस्सों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों को पश्चिम बंगाल में अपने परिसर स्थापित करने के लिए आमंत्रित करने का प्रयास करेगी। मंत्री ने कहा कि इस पहल से देश के अन्य हिस्सों और विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने के इच्छुक छात्रों को राज्य में ही बेहतर उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी के खिलाफ नहीं है, लेकिन यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य में शिक्षा को बिकाऊ वस्तु (कमोडिटी) न बनने दिया जाए।

छात्राओं को उच्च शिक्षा पूरी करने के लिए 50,000 रुपये किस्तों में

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के वास्ते विदेश जाने वाले मेधावी छात्रों के लिए स्वामी विवेकानंद के नाम पर छात्रवृत्ति जल्द शुरू की जाएगी। साथ ही, सरकार छात्राओं को उनकी उच्च शिक्षा पूरी करने के लिए 50,000 रुपये किस्तों में प्रदान करेगी। उच्च शिक्षा विभाग के लिए बजट प्रस्तावों पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा विधायक समरेंद्र नाथ घोष ने कहा कि बजट प्रस्तावों का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल की खोई हुई प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित करना है। उन्होंने राज्य में छह महिला महाविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बधाई भी दी।

Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in