

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में पदभार ग्रहण करने के तीन वर्ष पूरे होने से पहले शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ नो कॉन्फिडेंस प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा। इस संबंध में पंचायत अधिनियम में संशोधन हेतु एक विधेयक विधानसभा में पारित किया गया है। द वेस्ट बंगाल पंचायत (अमेंडमेंट) बिल, 2026 संशोधन के अनुसार, इसके प्रभावी यानी गठन होने की तिथि से अगले तीन वर्षों तक पंचायत के तीनों स्तरों ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के प्रमुख पदाधिकारियों के विरुद्ध नो कॉन्फिडेंस या पद से हटाने से संबंधित कोई प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा। वर्तमान व्यवस्था में ढाई वर्ष पूरे होने के बाद ऐसा प्रस्ताव लाया जा सकता था। कानून में किए गए बदलाव के तहत चुनाव के बाद पहले तीन वर्षों के भीतर ग्राम पंचायत के प्रधान व उपप्रधान, पंचायत समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष तथा जिला परिषद के सभाधिपति और सह-सभाधिपतियों को हटाने के लिए कोई बैठक नहीं बुलाई जा सकेगी। विधेयक पर चर्चा के दौरान पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रदीप मजुमदार ने कहा कि विकासात्मक परियोजनाओं को स्थायी रूप देने के लिए कम से कम तीन वर्षों का समय आवश्यक होता है। यह संशोधन पंचायतों में स्थिरता लाने और सेवाओं के सुचारु संचालन के उद्देश्य से किया गया है। अगर तीन साल के भीतर अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है, तो आम लोगों के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को सेवाएं प्रदान करना है। भाजपा विधायक ने इस संशोधन का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार पंचायतों में अपनी पकड़ मजबूत करने और आंतरिक गुटीय संघर्ष से बचने के लिए यह व्यवस्था कर रही है। मंत्री ने यह भी बताया कि निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है।