30 नवंबर तक अभिषेक के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं

हाई कोर्ट के जस्टिस भट्टाचार्य का आदेश
30 नवंबर तक अभिषेक के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं
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दी एफआईआर पर पूरी पाबंदी की चेतावनी

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ 30 नवंबर तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने तीन मामलों के सिलसिले में सोमवार को यह आदेश दिया। एक के बाद एक एफआईआर दर्ज किए जाने पर उन्होंने सख्त नाराजगी जताई। इसके साथ ही कहा कि अगर और शिकायत की गई तो कोर्ट की अनुमति के बगैर एफआईआर दर्ज करने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दूंगा।

जस्टिस भट्टाचार्य ने आदेश दिया है की विष्णुपुर थाने में दर्ज दो मामले और रविंद्रनगर थाने में दर्ज एक मामले के सिलसिले में यह आदेश लागू रहेगा। उन्होंने अभिषेक बनर्जी को जांच में सहयोग करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही पुलिस को आदेश दिया है कि पूछताछ के लिए पहले 48 घंटे की नोटिस देनी पड़ेगी। सेवाश्रय स्वास्थ्य शिविर के मामले में यह एफआईआर दर्ज की गई है। जस्टिस भट्टाचार्य ने सवाल किया कि यह शिकायतें मेडिकल काउंसिल या मेडिकल बोर्ड में क्यों नहीं की गई। पेटीशनर के खिलाफ कुल 16 शिकायतें हैं जिनमें से सात शिकायतें एक ही व्यक्ति ने की है। उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज करने की इस रवैया से वे संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि अब बहुत हो चुका है, मई से लगातार इस तरह के मामले सुनते आ रहे हैं। सात शिकायत एक ऐसे व्यक्ति ने दर्ज कराई है जो लोकसभा चुनाव में पेटीशनर से दो बार हार चुका है। उन्होंने इस सिलसिले में शुभेंदु अधिकारी के मामले में जस्टिस मंथा के आदेश का हवाला भी दिया। अभिषेक बनर्जी की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि अगर पिछली सरकार ने कोई गलती की थी तो इसका मतलब यह नहीं की नई सरकार भी इस गलती को दोहराएगी।

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