

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हावड़ा के साथ ही पूरे राज्य के हजारों स्कूलों में मिड-डे मील योजना गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही है। मार्च के बाद से इस योजना के लिए कोई फंड नहीं मिलने के कारण शिक्षकों को मजबूरन स्थानीय दुकानों से उधार लेकर बच्चों के लिए मिड डे मील चलाना पड़ रहा है। नतीजतन, दुकानदारों का पैसा चुकाने में असमर्थ शिक्षक भारी मानसिक तनाव और शर्मिंदगी का सामना कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पीएम पोषण योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,800 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव केंद्र सरकार को जून की शुरुआत में भेजा गया था। हालांकि, पर्याप्त आवंटन और मंजूरी का आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक एक भी रुपया प्राप्त नहीं हुआ है। विकास भवन के सूत्रों के अनुसार, राज्य के कई स्कूलों में मौजूदा भंडार पूरी तरह खत्म होने के कगार पर है।
आर्थिक संकट से जूझते सरकारी स्कूल
कम छात्र संख्या वाले और अपने स्वतंत्र फंड से वंचित स्कूलों की स्थिति सबसे दयनीय है। बाली-जगाछा ब्लॉक के एक प्रधानाध्यापक ने कहा कि किराने की दुकान पर उनका 50,000 से अधिक का उधार हो चुका है और दुकानदार के सामने अब उन्हें नजरें झुकाकर चलना पड़ रहा है। मुर्शिदाबाद और उत्तर बंगाल के अन्य स्कूलों में भी पिछले कई महीनों से यही हालात बने हुए हैं।
केंद्र से राशि मिलने का इंतजार
इस बीच, स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी परिस्थिति में मिड-डे मील योजना एक दिन के लिए भी नहीं रुकनी चाहिए। विभाग ने हाल ही में जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की तथा जल्द ही केंद्र से फंड मिलने और समस्या के पूर्ण समाधान का भरोसा जताया है। यदि समय रहते राशि जारी नहीं की जाती है तो राज्य भर में स्कूली बच्चों के लिए यह महत्वपूर्ण योजना अनिश्चितकाल के लिए बंद हो सकती है।