

नई दिल्लीः विरोध के प्रतीक के रूप में काली शॉल ओढ़े हुए, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कुछ ‘‘एसआईआर प्रभावित’’ परिवारों और पार्टी नेताओं के साथ सोमवार को यहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की, लेकिन यह मुलाकात अच्छी नहीं रही और ममता बनर्जी बीच में ही बैठक छोड़कर चली आईं।
पिछले हफ्ते, मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार ने बनर्जी को सोमवार को मुलाकात के लिए समय दिया था। बनर्जी चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रोकने की मांग कर रही हैं। रविवार को राजधानी पहुंचीं बनर्जी के साथ तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी भी मौजूद थे।
ममता बनर्जी ने बैठक से निकलने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैंने बहुत चुनाव आयोग देखे हैं, लेकिन ऐसा तोता पक्षी की तरह नहीं देखा। हमारा वहां असम्मान हुआ है। ठीक से हमारे प्रश्नों के उत्तर नहीं दिये गये। इसलिए हम बैठक बायकॉट कर बाहर चले आये। ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी जो कहती है, चुनाव आयोग वही करता है, लेकिन हमारे साथ जनता है। हम मैदान में लड़कर यह साबित करेंगे।
बैठक से पहले भी ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा था। पत्रकारों को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि बंगाल के लोग निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी समस्याएं उठाने आए हैं, लेकिन उन्हें ‘‘धमकी’’ दी जा रही है। उन्होंने बंग भवन परिसर के बाहर भारी पुलिस तैनाती पर भी सवाल उठाया।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से प्रभावित लगभग 50 परिवारों को राष्ट्रीय राजधानी लाया गया है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारियों से मिलने वाले 12 प्रतिनिधि एसआईआर से प्रभावित परिवारों से हैं। उन्होंने कहा कि इनमें वे लोग शामिल हैं जिन्हें गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया और उन लोगों के परिजनों के सदस्य भी शामिल हैं जिनकी कथित तौर पर ‘‘एसआईआर के कारण’’ मृत्यु हो गई।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि विरोध के प्रतीक के रूप में बनर्जी और अन्य लोगों ने काली शॉल ओढ़ रखी थी और अभिषेक बनर्जी ने काला स्वेटर पहन रखा था।