

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : नंदीग्राम के उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने मिलन प्रधान की तरफ से दायर पिटीशन पर मंगलवार को सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि इसकी अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी।
हालांकि राज्य सरकार की तरफ से अपील की गई कि इस पिटीशन को आज ही डिस्पोज कर दिया जाए। उनकी दलील थी कि इस पिटीशन में ऐसा कुछ भी नहीं है जो इसकी सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की जाए। जस्टिस भट्टाचार्य ने इंकार कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि इस पिटीशनर के खिलाफ कुल 11 मामले हैं। हल्दिया थाने में दर्ज हत्या के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया है। पहले के पांच मामलों के अलावा बाकी छह मामलों में से एक में उसे गिरफ्तार किया गया है। बाकी पांच मामलों को सरकार वापस ले चुकी है। मिलन प्रधान की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट अयन भट्टाचार्य ने कहा कि उनका पिटीशन दो मुद्दों पर था। पेटीशनर के खिलाफ कुल कितने मामले हैं इसकी जानकारी दी जाए और बाकी मामलों में सुरक्षा कवच किया दिया जाए। मतगणना के दिन यानी नौ अक्टूबर तक किसी मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि मिलन प्रधान को गिरफ्तार करके न्याय व्यवस्था का मखौल उड़ाया गया है। उसे उपचुनाव में उम्मीदवार बनने के बाद ही गिरफ्तार किया गया है, जबकि सारे मामले 2007 के हैं। उन्होंने कहा कि चार अक्टूबर चुनाव प्रचार का अंतिम दिन है और पेटीशनर उसमें हिस्सा नहीं ले पाएगा। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष शुभंकर सरकार भी मामले की सुनवाई के लिए आए थे। उन्होंने कोर्ट से बाहर मीडिया से कहा कि कांग्रेस के उम्मीदवार को गिरफ्तार करके उनके हौसले को तोड़ा नहीं जा सकता है। कहा कि नंदीग्राम के प्रत्येक व्यक्ति का नाम अब मिलन प्रधान है और यह नाम लोगों के दिलों दिमाग में बस गया है। हमें चुनाव प्रचार करने दिया जाए या नहीं इससे कोई फर्क नहीं आएगा।