निपाह का खतरा: मध्यमग्राम के बादुड़तल्ला इलाके में प्रशासन की विशेष नजरदारी

200 साल पुराने चमगादड़ों के बसेरे ने बढ़ाई चिंता
Nipah threat: Authorities maintaining special surveillance in Badurtala area of ​​Madhyamgram.
सांकेतिक फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

मध्यमग्राम: उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक निजी नर्सिंग होम में दो नर्सों के निपाह वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। संक्रमित नर्सों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है और वे वर्तमान में वेंटिलेशन पर हैं। इस घटना ने जिला स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। विशेष रूप से मध्यमग्राम का 'बादुड़तल्ला' इलाका अब प्रशासन के रडार पर है, क्योंकि यह क्षेत्र सदियों से हजारों चमगादड़ों का प्राकृतिक आवास रहा है।

बादुड़तल्ला: चमगादड़ों और इंसानों का सदियों पुराना साथ

मध्यमग्राम के इस इलाके का नाम 'बादुड़तल्ला' (चमगादड़ का स्थान) यहाँ स्थित एक विशाल और लगभग 200 साल पुराने बरगद के पेड़ के कारण पड़ा है। इस पेड़ और इसके आसपास के पेड़ों पर हजारों की संख्या में चमगादड़ निवास करते हैं। स्थानीय निवासी पीढ़ियों से इन चमगादड़ों के साथ सह-अस्तित्व में रहते आए हैं। उनके लिए यह एक सामान्य दृश्य है, लेकिन निपाह वायरस के प्रकोप ने इस बार स्थिति को गंभीर बना दिया है। चूंकि निपाह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों द्वारा कुतरे गए फलों, उनके मल-मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है, इसलिए यह सघन आबादी वाला क्षेत्र अब एक संभावित हॉटस्पॉट के रूप में देखा जा रहा है।

प्रशासनिक सतर्कता और चेयरमैन के निर्देश

बढ़ते खतरे को देखते हुए मध्यमग्राम नगर पालिका के चेयरमैन निमाई घोष ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य घबराहट (Panic) फैलाना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना है। चेयरमैन के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की एक विशेषज्ञ टीम जल्द ही बादुड़तल्ला का दौरा कर स्थिति का मुआयना करेगी।

नगर पालिका ने इलाके में विशेष स्वच्छता अभियान शुरू कर दिया है। पेड़ों के आसपास के क्षेत्रों में कीटाणुनाशक स्प्रे किया जा रहा है और कचरे के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, इलाके में लाउडस्पीकर के माध्यम से माइकिंग की जा रही है ताकि निवासियों को वायरस के लक्षणों और बचाव के तरीकों के बारे में बताया जा सके।

जनजीवन और जागरूकता की कमी

प्रशासनिक सक्रियता के बावजूद, ज़मीनी स्तर पर स्थानीय लोगों में अभी भी जागरूकता का अभाव देखा जा रहा है। कई निवासी अब भी बरगद के पेड़ के नीचे सामान्य रूप से खाना पकाने, बैठने और दैनिक कार्य करने में व्यस्त हैं। स्थानीय निवासी लियाकत अली और रोहित जमदार का कहना है कि वे बचपन से यहाँ चमगादड़ देख रहे हैं, इसलिए उन्हें शुरू में डर नहीं लगा, लेकिन अब बारासात की खबर सुनकर मन में थोड़ी शंका पैदा हुई है।

स्वास्थ्य विभाग की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र के लोगों से विशेष अपील की है:

  • पेड़ों से गिरे हुए या पक्षियों/चमगादड़ों द्वारा कुतरे गए फलों का सेवन बिल्कुल न करें।

  • खजूर का रस या खुले में रखे गए खाद्य पदार्थों से परहेज करें।

  • हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखें और संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें।

प्रशासन का कहना है कि बादुड़तल्ला जैसे संवेदनशील इलाकों में 'बायो-डायवर्सिटी पार्क' होने के कारण सुरक्षा और संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है, जिसे स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका मिलकर संभाल रहे हैं।

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