

नई दिल्लीः वेनेजुएला पर आक्रमण के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बिल्कुल तानाशाहों वाले रवैया अपनाने पर आमदा है। कई अन्य राष्ट्रों पर कब्जे या कार्रवाई की धमकी देने के बाद ट्रंप प्रशासन ने अब रूस से तेल खरीदने के बहाने भारत को भी सबक सिखाने का फैसला कर लिया है। ट्रंप भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं। अगर सचमुच में ऐसा होता है तो यह भारत-अमेरिका रिश्ते के काले अध्याय की शुरुआत होगी।
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यूक्रेन-रूस युद्ध रोकने के लिए रूस पर दबाव बनाने के लिए उसके तेल के निर्यात को पूरी तरह बाधित करना होगा। अमेरिका पहले भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा चुका है। भारत पर इस समय कुल 50 फीसदी शुल्क अमेरिका लगा चुका है जिससे भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात काफी प्रभावित हुआ है। ट्रंप ने अभी हाल में फिर से भारत को चेतावनी दी थी कि वह अगर पूरी तरह रूस से तेल नहीं खरीदता है तो उस पर और टैरिफ लगाया जाएगा।
सीनेटर ग्राहम ने नये बिल की मंजूरी की दी जानकारी
मीडिय रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ट्रंप प्रशासन रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए रूस पर और कड़े नए प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है। एक नये बिल सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025 में रूस समेत उन देशों पर 500% तक का टैरिफ लगाने का प्रावधान है जो जानबूझकर रूसी मूल के यूरेनियम और पेट्रोलियम उत्पादों के लेन-देन में शामिल होते हैं।
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल को "मंजूरी" दे दी, जिस पर महीनों से काम चल रहा था। ग्राहम ने एक्स पर लिखा, "आज राष्ट्रपति ट्रंप के साथ कई मुद्दों पर बहुत अच्छी मीटिंग के बाद, उन्होंने दोनों पार्टियों के रूस पर बैन लगाने वाले बिल को हरी झंडी दे दी है।"
इस बिल की मंजूरी के बाद रूस से तेल खरीदने को लेकर रूस के साथ ही भारत पर भी 500 फीसदी टैरिफ लग सकती है।
भारत पर प्रभाव का इंतजार
ट्रंप प्रशासन द्वारा नये बिल को मंजूरी दिये जाने के बाद भारत पर इसका किस तरह से प्रभाव पड़ता है और ट्रंप प्रशासन वास्तव में कितना प्रतिशत और टैरिफ लगाता है, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन जो भी होगा, वह सचमुच भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ भारत-अमेरिका संबंधों के लिए बुरा होगा।
गौरतलब है कि पिछले साल, ट्रंप ने अपनी टैरिफ मुहिम को और बढ़ा दिया, भारतीय इंपोर्ट पर 25 परसेंट का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया, साथ ही रूसी तेल खरीदने पर 25 परसेंट की एक्स्ट्रा पेनल्टी भी लगाई, जिससे कुछ प्रोडक्ट्स पर कुल ड्यूटी 50 परसेंट तक पहुंच गई। इस कदम से नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए।
पहले किन वस्तुओं पर लगे थे टैरिफ
अमेरिका ने पहले जो टैरिफ लगाया था उससे अमेरिकी बाजार पर निर्भर भारतीय उद्योगों पर काफी बड़ा प्रभाव पड़ा है। रत्न और आभूषण, कपड़ा व्यापार, फर्नीचर और ऑटो कंपोनेंट जैसे क्षेत्रों में मांग की कमी और व्यापार संबंधों में परेशानी देखी जा रही है। इस टैरिफ में इंडस्ट्रियल से लेकर कंज्यूमर प्रोडक्ट तक कई तरह की वस्तुएं शामिल हैं। जैसे रत्न और आभूषण, चमड़ा उत्पाद, जूते, इलेक्ट्रॉनिक, फर्नीचर, मशीनरी, कृषि उत्पाद और समुद्री उत्पाद। समुद्री उत्पाद में भारतीय झींगा निर्यात पर काफी ज्यादा फर्क पड़ा है। इसी के साथ कृषि उत्पाद में चावल, मसालें और चाय पर असर पड़ा है।