

कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अपने वक्तव्य को लेकर राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। इस बार मामला रामकृष्ण परमहंस की 191वीं जन्मतिथि पर दी गई श्रद्धांजलि से जुड़ा है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उन्हें “स्वामी रामकृष्ण परमहंसजी” कहकर नमन किया और कहा कि उन्होंने आध्यात्मिकता तथा साधना को जीवनशक्ति के रूप में स्थापित किया, जो युगों तक मानवता को प्रेरित करती रहेगी।
प्रधानमंत्री द्वारा ‘स्वामी’ शब्द के प्रयोग पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण परमहंस को श्रद्धालु ‘ठाकुर’ के रूप में पूजते हैं और उनके नाम के आगे ‘स्वामी’ लगाना परंपरा के अनुरूप नहीं है। ममता बनर्जी ने इसे बंगाल की भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामकृष्ण परंपरा में ‘ठाकुर–मां–स्वामीजी’ की पवित्र त्रयी मानी जाती है। इसमें रामकृष्ण परमहंस ‘ठाकुर’, मां शारदा देवी ‘मां’ और स्वामी विवेकानंद ‘स्वामीजी’ के रूप में विख्यात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार ऐसे संबोधन बंगाल के महापुरुषों की स्थापित परंपरा को बदलने का प्रयास प्रतीत होते हैं।
यह पहला अवसर नहीं है जब प्रधानमंत्री के शब्दों को लेकर विवाद हुआ हो। पिछले वर्ष संसद के शीतकालीन सत्र में ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा के दौरान उन्होंने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को ‘बंकिम दा’ कहकर संबोधित किया था, जिस पर तृणमूल कांग्रेस ने आपत्ति जताई थी।
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे बंगाल के नवजागरण के महापुरुषों के संदर्भ में प्रचलित और सम्मानजनक संबोधन का ही उपयोग करें तथा क्षेत्रीय आस्थाओं और भावनाओं का सम्मान करें। राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।