नेपाल ने बदला फैसला! भारतीय आमों पर नहीं लगा कोई बैन, बाजार में मिलेगी एंट्री

कीटनाशक और क्वारंटीन विवाद के बीच नेपाल सरकार की सफाई, नियमों और मांग के आधार पर जारी रहेगा भारतीय आमों का आयात
नेपाल ने बदला फैसला! भारतीय आमों पर नहीं लगा कोई बैन, बाजार में मिलेगी एंट्री
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काठमांडू : भारतीय आमों के आयात को लेकर उठे विवाद के बीच नेपाल सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। नेपाल के कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने साफ किया है कि भारतीय आमों पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और निर्धारित नियमों के तहत इन फलों को नेपाली बाजारों में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।

यह बयान उन खबरों के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया था कि नेपाल ने अत्यधिक कीटनाशक अवशेषों और सीमावर्ती क्षेत्रों में क्वारंटीन सुविधाओं की कमी के कारण भारतीय आमों के आयात को सीमित कर दिया है।

नेपाल सरकार ने क्या कहा?

मंत्रालय के अधीन प्लांट क्वारंटीन एंड पेस्टिसाइड मैनेजमेंट सेंटर ने कहा कि भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाए जाने संबंधी खबरें भ्रामक हैं। केंद्र ने स्पष्ट किया कि भारत से आमों के आयात पर कोई रोक नहीं है और मांग तथा गुणवत्ता मानकों के आधार पर आयात जारी रहेगा।

रोकी गई खेप को भी मिली मंजूरी

हाल ही में मधेश प्रांत के भिट्टामोड़ क्वारंटीन जांच केंद्र पर भारत से आए आमों की एक बड़ी खेप को हानिकारक कीटों की आशंका के चलते रोक दिया गया था। हालांकि, भारतीय अधिकारियों द्वारा आवश्यक प्लांट हेल्थ सर्टिफिकेट प्रस्तुत किए जाने के बाद उस खेप को मंजूरी दे दी गई।

मधेश प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।

व्यापारियों ने जताई थी चिंता

नेपाल के फल एवं सब्जी व्यापारियों ने पहले चेतावनी दी थी कि भारतीय आमों के आयात पर रोक से बाजार में फलों की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। व्यापारियों ने सरकार से पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय क्वारंटीन और गुणवत्ता जांच व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की थी।

भारत-नेपाल व्यापार को राहत

नेपाल सरकार के ताजा बयान से भारतीय आम निर्यातकों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। नेपाल भारतीय आमों के प्रमुख बाजारों में से एक है और हर साल बड़ी मात्रा में भारतीय आम वहां निर्यात किए जाते हैं।

सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद दोनों देशों के बीच आमों का व्यापार सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है।

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