

नई दिल्लीः भारत ने स्वदेशी रूप से निर्मित अपनी नयी परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी ‘आईएनएस अरिदमन’ को शुक्रवार को सेवा में शामिल कर लिया, जिससे देश के ‘परमाणु त्रय’ के नौसैन्य घटक को और मजबूती मिली है। भारत का परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) कार्यक्रम एक अत्यंत गोपनीय परियोजना है। ‘आईएनएस अरिहंत’ एसएसबीएन परियोजना के तहत पहली पनडुब्बी थी, जिसके बाद दूसरी पनडुब्बी ‘आईएनएस अरिघात’ आई।
भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल है, जिनके पास परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हैं। जिन देशों के पास ऐसी क्षमताएं हैं, उनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन शामिल हैं। आईएनएस अरिहंत भारत की पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी है। इसकी शुरुआत जुलाई 2009 में की गई थी और 2016 में इसे सेवा में शामिल किया गया। नौसेना ने अगस्त 2024 में अपनी दूसरी स्वदेशी एसएसबीएन पनडुब्बी आईएनएस अरिघात को सेवा में शामिल किया। एसएसबीएन का पूरा नाम ‘शिप सबमर्सिबल बैलिस्टिक न्यूक्लियर’ या परमाणु चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है।
महीनों तक चले समुद्री परीक्षणों के बाद ‘आईएनएस अरिदमन’ को सेवा में शामिल किया गया है। जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केरल स्थित एक नौसैन्य प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में शिरकत की। रक्षा मंत्री ने आज सुबह एक गूढ़ सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘शब्द नहीं शक्ति है, ‘अरिदमन’!’’
हालांकि, भारत के पास हवा और ज़मीन से दागी जाने वाली परमाणु क्षमताएं मौजूद हैं, लेकिन अब वह अपनी पानी के नीचे की परमाणु शक्ति को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।