

नई दिल्ली : सरकार ने मुश्किल और गहरे समुद्री क्षेत्रों से उत्पादित प्राकृतिक गैस की कीमत की अधिकतम सीमा बढ़ा दी है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, गहरे पानी, अति गहरे पानी तथा हाई प्रेशर-हाई टेंपरेचर (HPHT) वाले क्षेत्रों से निकलने वाली गैस की अधिकतम कीमत अब 8.90 डॉलर से बढ़कर 9.89 डॉलर प्रति MMBtu हो गई है। नई दर 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गई है और 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी।
नई व्यवस्था के तहत मुश्किल समुद्री क्षेत्रों से निकलने वाली प्राकृतिक गैस की अधिकतम कीमत में करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। भारतीय मुद्रा में देखें तो यह दर लगभग 930 रुपये से बढ़कर 1,030 रुपये प्रति MMBtu के आसपास पहुंच गई है। यह बदलाव उन गैस क्षेत्रों पर लागू होगा, जहां सामान्य क्षेत्रों की तुलना में गैस का उत्पादन अधिक खर्चीला होता है।
इस बदलाव से गहरे और अति गहरे समुद्री क्षेत्रों में गैस उत्पादन करने वाली कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है। कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन के KG-D6 जैसे ब्लॉक भी इस तरह की गैस उत्पादन व्यवस्था के दायरे में आते हैं।
प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल शहरों में CNG और PNG की आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। ऐसे में गैस की कीमत बढ़ने से गैस वितरण कंपनियों की लागत प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, अधिकतम गैस कीमत में बढ़ोतरी का यह मतलब नहीं है कि CNG और PNG के दाम भी उसी अनुपात में तुरंत बढ़ जाएंगे। अंतिम कीमत पर गैस की खरीद लागत के साथ-साथ अन्य कई कारकों का भी असर पड़ता है।
प्राकृतिक गैस केवल परिवहन और घरेलू ईंधन तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन और उर्वरक (खाद) बनाने में भी महत्वपूर्ण कच्चे माल के तौर पर होता है। इसलिए मुश्किल समुद्री क्षेत्रों से मिलने वाली गैस की अधिकतम कीमत बढ़ने से इन क्षेत्रों की लागत पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां किस कीमत पर गैस खरीदती हैं और बढ़ी हुई लागत का कितना हिस्सा आगे उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। ऐसे में आने वाले महीनों में CNG, PNG, बिजली और उर्वरक क्षेत्र में इसका असर देखने को मिल सकता है।