मुंबई 26/11 हमले का आरोपी तहव्वुर राणा आ रहा है भारत

17 साल बाद भारत सरकार के शिकंजे में फंसा तहव्वुर राणा
मुंबई 26/11 हमले का आरोपी तहव्वुर राणा आ रहा है भारत
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नई दिल्ली : सन् 2008 का जयपुर सीरियल ब्लास्ट (71 मौतें, 175 घायल), 2013 का हैदराबाद डबल ब्लास्ट (18 की मौत, 133 घायल) और सन् 2008 का मुंबई हमला (166 लोगों की मौत तथा 300 घायल)- देश के सीने पर लगे तीन जख्मों का मरहम समय ने अब लगाया है, वह भी एक साथ पिछले 24 घंटों के दौरान। जयपुर सीरियल ब्लास्ट के 4 कातिलों को स्पेशल कोर्ट ने 8 अप्रैल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, वहीं हैदराबाद डबल ब्लास्ट मामले में पांचों दोषियों को मृत्युदंड देने के फैसले को 8 अप्रैल को तेलंगाना हाई कोर्ट ने बरकरार रखा, दूसकी ओर सूत्रों ने खबर दी है कि मुंबई हमले के मास्टर माइंड तहव्वुर राणा को लेकर 9 अप्रैल को एक फ्लाइट अमेरिका से भारत रवाना हो गयी है।

26 नवंबर 2008 को मुंबई को दहलाने वाले पाकिस्तानी तहव्वुर राणा का हिसाब होना अब निर्धारित है, क्योंकि संभवतः गुरुवार सुबह वह भारत पहुंचने वाला है। तहव्वुर राणा 26/11 हमलों का मास्टर माइंड है। वह लंबे अरसे से एक अन्य मामले में अमेरिका की जेल में बंद था। भारत सरकार सन् 2019 से उसे देश वापस लाने की कोशिशों में जुटी हुई थी। यह कोशिशें अब रंग लाई हैं। तहव्वुर को 10 अप्रैल, गुरुवार सुबह तक भारत लाया जा सकता है। यहां वह एऩआईए की हिरासत में रहेगा।

अब तक क्या-क्या हुआ ?

सन् 2009 में तहव्वुर राणा को डेनमार्क के एक अखबार पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सन् 2011 में राणा को अखबार पर हमला मामले में दोषी ठहराते हुए 13 साल जेल की सजा सुनाई गयी। सन् 2019 में भारत ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण की मांग को लेकर अमेरिका को कूटनीतिक नोट सौंपा तथा सन् 2020 में भारत ने राणा की अस्थायी गिरफ्तारी के लिए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। 13 नवंबर 2024 को उसने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका दायर की थी।

16 दिसंबर 2024 को अमेरिकी सॉलिसिटर जनरल एलिजाबेथ बी प्रीलोगर ने सुप्रीम कोर्ट से राणा की याचिका खारिज करने का अनुरोध किया। 21 जनवरी 2025 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राणा की याचिका खारिज कर दी, जिससे भारत में उसके प्रत्यर्पण का मार्ग प्रशस्त हुआ। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण के संबंध में अगले कदमों का मूल्यांकन करने की घोषणा की।फरवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने राणा के भारत प्रत्यर्पण की पुष्टि की तथा 7 मार्च 2025 अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से स्वास्थ्य हवाले पर आतंकी तहव्वुर राणा की याचिका खारिज कर दी। तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है।

मुंबई के जख्मों का हिसाब

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले ही 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के अभियुक्त तहव्वुर राणा की भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। तहव्वुर ने याचिका के जरिए प्रत्यर्पण के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी। उसने बिगड़े स्वास्थ्य और यातना का हवाला दिया, लेकिन उसका कोई पैंतरा काम नहीं आया। अपनी याचिका की सुनवाई के दौरान राणा भारत न भेजे जाने को लेकर कोर्ट के सामने खूब गिड़गिड़ाया। उसने कोर्ट से यहां तक कह दिया था कि अगर उसे भारत भेजा जाता है को उसे वहां टॉर्चर किया जाएगा। लेकिन उसके ये पैतरें काम नहीं आए। कोर्ट ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया। अब उसे अमेरिका से भारत लाया जा रहा है। उसके बाद मुंबई हमलों में जान गंवाने वाले 166 लोगों के हर जख्म का हिसाब होगा। पीड़ितों में भारत के अतिरिक्त 14 अन्य देशों के नागरिक शामिल थे।

गौरतलब है कि तहव्वुर राणा पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली का सहयोगी है, जो 2008 में मुंबई में 26 नवंबर को हुए हमलों के प्रमुख मास्टर माइंड में से एक है। वह एक पाकिस्तानी मूल का आतंकी है। समझा जाता है कि उसके आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस, जिसे आईएसआई भी कहा जाता है, उसके साथ संबंध हैं। राणा पाकिस्तान आर्मी में डॉक्टर था, वहां से यह कनाडा शिफ्ट हुआ। वहां राणा की हेडली से मुलाकात हुई। राणा ताज की रेकी करने के लिए होटल में रुका था। बाद में जब इससे पूछताछ हुई तो इसने कहा कि वह इमिग्रेशन की कंपनी के लिए इंटरव्यू कर रहा था। बाद में यह साबित हुआ कि हेडली और राणा दोनों ने जानकारी जैश को भेजी। इसके अतिरिक्त राणा के शिकागो के घर में बैठक करता था लेकिन वहां डेनिश अखबार पर हमले के बाद इस पर शिकंजा कसना शुरू हुआ।

तहव्वुर राणा की भूमिका

जिस डेविड हेडली ने लश्यर-ए-तैयबा को मुंबई हमले के सारे कोओर्डिनेटर भेजे थे उसी का तहव्वुर राणा साथी था। राणा ने एक इमिग्रेशन एजेंसी खोली थी, जिसकी अलग-अलग देशों में शाखाएं थीं, जो इस काम में लोगों की मदद करती थी कि कैसे विदेशों में जाने के लिए कागजी कार्रवाई की जाए। इसी का एक ऑफिस मुंबई के ताड़देव इलाके में हेडली ने खोला था। यही से हेडली ने सारे लोकेशन के जीपीएस कोओर्डिनेट लश्कर-ए-तैयबा को भेजे थे।

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