अंडमान एवं निकोबार में किसानों के संकट पर सांसद की गंभीर चिंता

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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के सांसद बिष्णु पद रे ने कृषि विभाग और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की लापरवाही और विफलता पर कड़ी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इनकी उदासीनता के कारण द्वीप समूह में फसलों और बाग़ानों को भारी नुकसान हुआ है और किसान गहरी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। सांसद रे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भेजे अपने पत्र में उल्लेख किया है कि द्वीप समूह के किसान नारियल, सुपारी, केले और अन्य फलदार फसलों में भारी नुकसान झेल रहे हैं। लगातार चेतावनी देने के बावजूद केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने कोई ठोस रोकथाम या वैज्ञानिक नियंत्रण उपाय नहीं किए। उन्होंने कहा कि जबकि प्रधानमंत्री का लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना है, वहीं अंडमान एवं निकोबार की हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। नारियल का पानी जो पहले एक लीटर से अधिक निकलता था, अब घटकर मुश्किल से 400–500 मिलीलीटर रह गया है। सुपारी का उत्पादन 10 टन से घटकर कुछ सौ किलो रह गया है और स्थानीय केले की किस्में लगभग समाप्त हो गई हैं। निकोबार ज़िले के आदिवासी किसान, जो आजीविका और खाद्य सुरक्षा के लिए पूरी तरह खेती पर निर्भर हैं, बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सांसद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि किसानों, पंचायती राज संस्थाओं और यहां तक कि स्वयं सांसद के बार-बार के आग्रह को भी नज़रअंदाज़ किया गया।

उन्होंने कहा कि कृषि विभाग गैर-तकनीकी अधिकारियों द्वारा चलाया जा रहा है जिनके पास कृषि का कोई अनुभव नहीं है और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद वैज्ञानिक व अधिकारी कई बैठकों और निरीक्षणों के बावजूद नतीजे देने में विफल रहे हैं। सांसद रे ने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। उन्होंने कहा कि ज़रूरी है कि मुख्य भूमि से विशेषज्ञ वैज्ञानिक टीम भेजी जाए, जो मौके पर जाकर किसानों से संवाद करे और वैज्ञानिक नियंत्रण उपाय तत्काल शुरू किए जाएं। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद वैज्ञानिकों पर लापरवाही का ज़िम्मा तय करने, अंडमान एवं निकोबार में कृषि निदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों के पदों पर योग्य कृषि विशेषज्ञों की नियुक्ति करने, प्रभावित किसानों और आदिवासी समुदायों को सर्वेक्षण के बाद उचित मुआवज़ा देने और किसानों को आधुनिक खेती के तौर-तरीकों की ट्रेनिंग की व्यवस्था करने की आवश्यकता बताई। सांसद रे ने कहा कि यदि त्वरित कार्रवाई नहीं हुई तो द्वीप समूह के हज़ारों किसानों की आजीविका पूरी तरह चौपट हो जाएगी और किसानों को सशक्त बनाने की प्रधानमंत्री की परिकल्पना असफल हो जाएगी। उन्होंने भारत सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर किसानों को बचाने और दूरदराज़ द्वीपों में खाद्य एवं आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

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