अंडमान में वन अतिक्रमणकारी परिवारों के पुनर्वास पर सांसद ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

अंडमान में वन अतिक्रमणकारी परिवारों के पुनर्वास पर सांसद ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री से लंबे समय से लंबित वन अतिक्रमणकारी परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना को शीघ्र स्वीकृति और लागू करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए सांसद ने कहा कि द्वीपसमूह के विभिन्न क्षेत्रों में प्री-1978 और पोस्ट-1978 श्रेणी के हजारों वन अतिक्रमणकारी परिवारों की पहचान की गई है, जो अब तक उचित पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लगभग 515 प्री-1978 परिवार और 3,463 पोस्ट-1978 परिवारों को पुनर्स्थापन हेतु चिन्हित किया गया है।

उन्होंने बताया कि अंडमान एवं निकोबार प्रशासन द्वारा एक व्यापक पुनर्वास योजना वर्ष 2003 में ही तैयार कर गृह मंत्रालय को भेजी गई थी, लेकिन दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस योजना को अब तक लागू नहीं किया जा सका है। इस देरी का मुख्य कारण मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित होना बताया गया है। सांसद ने संबंधित मामले की शीघ्र सुनवाई और निपटान का अनुरोध किया है ताकि पुनर्वास योजना को लागू किया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से हो रही देरी के कारण प्रभावित परिवार आज भी पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहकर कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं।

सांसद ने तटीय क्षेत्रों में इन परिवारों के पुनर्वास के रणनीतिक महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने मोहन भागवत के हालिया वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि तटीय क्षेत्रों में मानव बसावट को मजबूत करना राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर विदेशी घुसपैठ और अवैध शिकार जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए। अपने ज्ञापन में सांसद ने उच्चतम न्यायालय में लंबित मामले की शीघ्र सुनवाई, गृह मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय एवं अंडमान-निकोबार प्रशासन के बीच समन्वित कार्रवाई, समयबद्ध पुनर्वास योजना का क्रियान्वयन तथा सभी पात्र परिवारों को शामिल करने के लिए पुनः सर्वेक्षण की मांग की है। उन्होंने कहा कि समय पर कार्रवाई न केवल एक लंबे समय से लंबित मानवीय मुद्दे का समाधान करेगी, बल्कि तटीय सुरक्षा, सुनियोजित विकास और राष्ट्रीय हित को भी सुदृढ़ करेगी।

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