अंडमान में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सांसद ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव से हस्तक्षेप की मांग की

अंडमान में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सांसद ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव से हस्तक्षेप की मांग की
Munmun
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद विष्णु पद रे ने सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्या सलीला श्रीवास्तव से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने द्वीपसमूह की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की। बैठक में विष्णु पद रे ने कहा कि द्वीपसमूह में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली अब “जनता के जीवन और मौत का सवाल” बन चुकी है। उन्होंने मंत्रालय से आग्रह किया कि पर्याप्त चिकित्सा ढांचा विकसित होने तक अल्पकालिक और दीर्घकालिक आधार पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती जारी रखी जाए। सांसद ने बताया कि द्वीपसमूह में स्वीकृत 50 विशेषज्ञ पदों में से केवल छह ही भरे गए हैं, जबकि स्त्री रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट, मूत्ररोग विशेषज्ञ, गुर्दा रोग विशेषज्ञ, कैंसर रोग विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक, रेडियोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और आर्थोपेडिक विशेषज्ञ जैसी ज़रूरी विशेषज्ञताओं का जिले के अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पूरी तरह अभाव है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को अंतर-द्वीपीय क्षेत्रों से जी.बी. पंत अस्पताल तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में इज़ाफ़ा हो रहा है और मरीजों को भारी कष्ट झेलना पड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि योग्य विशेषज्ञों की अनुपलब्धता और लापरवाही के डर से कई मरीज इलाज कराने से कतराते हैं, जिसके चलते टाली जा सकने वाली मौतें भी हो रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि इस मुद्दे को उन्होंने 2 अगस्त 2024 को संसद में भी उठाया था और कई पत्राचार एवं उपराज्यपाल के आग्रह के बावजूद अब तक कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने

ने अंडमान-निकोबार आयुर्विज्ञान संस्थान (ए.एन.आई.आई.एम.एस) को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को सौंपने या सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत संचालित करने का सुझाव दिया। साथ ही, उन्होंने एआईआईएमएस की एक विशेषज्ञ टीम को द्वीपसमूह भेजकर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और सुधारात्मक सुझाव देने की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने विभिन्न अस्पतालों के विशेषज्ञ पदों को एकीकृत कर उनके स्थानांतरण और उपलब्धता को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और टॉनिक की लगातार कमी का मुद्दा भी उठाया, जिसके कारण मरीजों को मजबूरी में निजी दुकानों से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए रे ने मंत्रालय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती का पूर्व का रोटेशन सिस्टम बहाल करने, ए.एन.आई.आई.एम.एस के प्रबंधन में त्वरित सुधार लागू करने, द्वीपसमूह में एआईआईएमएस /विशेषज्ञ टीम भेजने और विशेषज्ञ पदों की संरचना में बदलाव कर उन्हें अधिक सुलभ बनाने की मांग की।

उन्होंने दोहराया कि यह मामला द्वीपवासियों के जीवन-मरण का प्रश्न है और मंत्रालय को इसमें अब और देरी नहीं करनी चाहिए। बैठक के अंत में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सांसद की चिंताओं को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि इन मुद्दों पर अंडमान-निकोबार प्रशासन के मुख्य सचिव के साथ परामर्श कर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।


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