एसआईआर पर हंगामे की भेंट चढ़ा मानसून सत्र, संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

स्पीकर और उपसभापति ने गतिरोध के लिए विपक्ष को जिम्मवार ठहराया!
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नयी दिल्ली : संसद का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया और इस दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण लगातार गतिरोध बना रहा। इसके कारण लोकसभा की उत्पादकता जहां महज 31 घंटे प्रतिशत रही वहीं राज्यसभा में यह 39 फीसदी रही।

विपक्षी दलों के प्रति जतायी निराशा

लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मानसून सत्र के दौरान कार्यवाही में गतिरोध बनाये रखने पर विपक्षी दलों के प्रति निराशा प्रकट करते हुए कहा कि नियोजित तरीके से सदन के कामकाज में व्यवधान पैदा किया गया जो लोकतंत्र और सदन की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। इसी प्रकार राज्यसभा में उपसभापति हरिवंश ने सत्र के दौरान लगातार बने गतिरोध पर निराशा जताते हुए कहा कि सूचीबद्ध कार्यों पर सार्थक और सुचारू चर्चा सुनिश्चित करने के आसन के भरसक प्रयासों के बावजूद, यह सत्र दुर्भाग्यवश बार-बार व्यवधानों के कारण बाधित रहा, जिसके परिणामस्वरूप बार-बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इससे न केवल बहुमूल्य संसदीय समय की हानि हुई बल्कि हमें लोक महत्व के कई मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर भी नहीं मिला।

संशोधन विधेयकों को जेपीसी को भेजने पर दोनों सदनों की मंजूरी

मानसून सत्र की शुरूआत 21 जुलाई को हुई और इस दौरान कुल 21 बैठकें हुई। मानसून सत्र के दौरान कामकाज के लिए 120 घंटे उपलब्ध थे लेकिन इस दौरान लोकसभा में केवल 37 घंटे और राज्यसभा में मात्र 41 घंटे 15 मिनट कामकाज हो पाया। सत्र के दौरान दोनों सदनों में कुल 15 विधेयक पारित किये गये। इस दौरान सरकार ने लोकसभा में कुल 14 विधेयक पेश किये। गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के भारी हंगामे के बीच बुधवार को ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किये। इनमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किये जाने और लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहने पर पद से हटाये जाने का प्रावधान है। लोकसभा में जब गृहमंत्री इन तीनों विधेयकों को पेश कर रहे थे, उस समय विपक्ष के कुछ सदस्यों को उनके सामने कुछ कागज फाड़कर फेंकते देखा गया। सरकार ने इन तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेजने का प्रस्ताव किया, जिसे दोनों सदनों ने मंजूरी दे दी।

पारित हुए विधेयक

सत्र के दौरान दोनों सदनों में अनुसूचित जनजातियों के विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्समायोजन से संबंधित गोवा विधेयक 2025, मर्चेंट शिपिंग विधेयक 2025, मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025, मणिपुर विनियोग (संख्या 2) विधेयक 2025, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 और राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग (संशोधन) विधेयक 2025 पारित किये गये। इनके अलावा आयकर विधेयक 2025, कराधान कानून (संशोधन) विधेयक 2025, भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025, खनिज और खनिज विकास (विनियमन और संशोधन) विधेयक 2025, भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक 2025 और ऑनलाइन खेल संवर्धन और विनियमन विधेयक, 2025 भी हंगामे के बीच दोनों सदनों में पारित किये गये। सत्र के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में दोनों सदनों में विशेष चर्चा हुई।

विपक्ष ने अनौपचारिक बातचीत का किया ‘बहिष्कार’

सत्र के पहले ही दिन राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देर शाम स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंप दिया था, जिसे बाद में स्वीकार कर लिया गया। सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष के कमरे में जाकर दोनों पक्ष के नेता आपस में मिलते और अनौपचारिक बातचीत करते हैं। सूत्रों के अनुसार इस बार लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में प्रधानमंत्री, कई मंत्री तथा सत्तापक्ष के नेता तो गये लेकिन दोनों सदनों के नेता प्रतिपक्ष एवं अन्य कोई प्रमुख विपक्षी नेता वहां नहीं गया।

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