

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बांग्लादेश में लावारिस हालत में घूम रहे एक मानसिक रूप से अस्वस्थ भारतीय बुजुर्ग की आखिरकार पहचान हो गई है। चार महीने तक चली खोजबीन के बाद पता चला कि वह पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रहने वाले तीनकौड़ी ऋषि हैं। अब उन्हें भारत वापस लाकर परिवार से मिलाने की तैयारी चल रही है। मिली जानकारी के अनुसार, 10 मार्च 2025 को बांग्लादेश के रंगपुर जिले के काउनिया इलाके में एक हाईवे के किनारे तीनकौड़ी ऋषि को असहाय अवस्था में पाया गया था। बांग्लादेश के हैम रेडियो ऑपरेटरों ने उन्हें देखा और मानवता के आधार पर उनका रेस्क्यू किया। इसके बाद पश्चिम बंगाल रेडियो क्लब से संपर्क कर मामले की जानकारी दी गई। इस बीच सोशल मीडिया पर बुजुर्ग को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलने लगीं। कुछ लोगों ने बिना किसी प्रमाण के उन्हें किसी खुफिया एजेंसी से जुड़ा व्यक्ति तक बता दिया।
हैम रेडियो की मदद से परिवार से हुआ संपर्क
हालांकि, हैम रेडियो संगठनों ने अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय उनकी पहचान की जांच जारी रखी। तस्वीरों के आधार पर पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी उनके भांजे विक्रम ऋषि से संपर्क हुआ। उन्होंने बताया कि यह उनके मामा तीनकौड़ी ऋषि हैं, जो करीब पांच वर्ष पहले परिवार से लापता हो गए थे। परिवार की जानकारी के साथ चुनाव आयोग के वोटर पहचान पत्र और आधार कार्ड के विवरण का मिलान करने के बाद उनकी पहचान की पुष्टि हुई। फिलहाल तीनकौड़ी ऋषि बांग्लादेश के रंगपुर जिले के पीरगाछा रेलवे स्टेशन के पास हैं। बांग्लादेश हैम रेडियो के सदस्य जैनुल आबेदीन उनकी देखभाल कर रहे हैं और उन्हें भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। पश्चिम बंगाल रेडियो क्लब और बांग्लादेश हैम रेडियो क्लब की मदद से उन्हें भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए भारतीय उच्चायोग से भी संपर्क किया गया है। वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के सचिव अंबरीष नाग विश्वास ने बताया कि प्रयास जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही तीनकौड़ी ऋषि अपने परिवार के पास लौट आएंगे।