बेसहारा पशुओं के लिए उम्मीद बनी मिरेकल फॉर वॉयसलेस'

मनीषा ने कोरोना काल में पशु सेवा की शुरुआत की
बेसहारा पशुओं के लिए उम्मीद बनी मिरेकल फॉर वॉयसलेस'
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500 से अधिक डॉग्स को दिया जाता है भोजन

बिना सरकारी मदद के भी जारी है सेवा कार्य

पोस्ता, बड़ाबाजार, टी बोर्ड और आरजी कर में सेवा

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : शहर में तेजी से बढ़ती बेसहारा पशुओं की समस्या के बीच समाजसेवी महिला मनीषा चौधरी द्वारा संचालित एनजीओ 'मिरेकल फॉर वॉयसलेस' आज निःस्वार्थ पशु सेवा की एक सशक्त पहचान बन चुका है। यह एनजीओ न केवल सैकड़ों बेसहारा डॉग्स को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध करा रहा है, बल्कि घायल, बीमार और भूखे जानवरों के इलाज और देखभाल का भी जिम्मा उठा रहा है। उल्लेखनीय है कि मनीषा आर्य कन्या महाविद्यालय में शिक्षिका भी हैं और शिक्षण कार्य के साथ-साथ वह पूरी निष्ठा से पशु सेवा में जुटी हुई हैं जो समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है।

कोरोना काल में रखी गयी सेवा की नींव

मनीषा चौधरी ने बताया कि वर्ष 2020, कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने इस सेवा कार्य की शुरुआत की। उस समय जहां लोगों के लिए तो भोजन की व्यवस्थाएं थीं, वहीं बेसहारा जानवर भूख से दम तोड़ रहे थे। खासकर बड़ाबाजार जैसे इलाकों में कई डॉग्स को प्लास्टिक और कचरा खाते हुए देखा गया, जो बेहद पीड़ादायक था। इसी पीड़ा ने उन्हें इस दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

10 किलो अनाज से 500 डॉग्स तक का सफर

शुरुआत में मनीषा ने अपने निजी खर्च पर केवल 10 किलो अनाज से 50-60 डॉग्स को खाना खिलाना शुरू किया था। धीरे-धीरे उनके इस प्रयास में परिवार और मित्रों का सहयोग जुड़ता गया। आज स्थिति यह है कि एनजीओ प्रतिदिन 500 से अधिक डॉग्स को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहा है। पोस्ता, बड़ाबाजार, टी बोर्ड, आरजीकर सहित कई इलाकों में नियमित रूप से भोजन पहुंचाया जाता है। 'मिरेकल फॉर वॉयसलेस' केवल भोजन तक सीमित नहीं है। एनजीओ के माध्यम से घायल और बीमार जानवरों को प्राथमिक इलाज, दवाइयां औरबेसहारा पशुओं के लिए उम्मीद बनी मिरेकल फॉर वॉयसलेस'

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