एमआईबीएफ ने किया निवेशक सम्मेलन का आयोजन

दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण और एआई आधारित रणनीतियों पर जोर
एमआईबीएफ ने किया निवेशक सम्मेलन का आयोजन
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : माहेश्वरी इंटरनेशनल बिजनेस फाउंडेशन (एमआईबीएफ) ने सोमवार को एक उच्चस्तरीय निवेशक सम्मेलन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वित्त एवं पूंजी बाजार से जुड़े प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने सतत संपत्ति निर्माण और भारत के बदलते निवेश परिदृश्य पर विचार-विमर्श किया। सत्र का नेतृत्व एमआईबीएफ की अध्यक्ष ममता बिनानी तथा संस्थापक एवं महासचिव संतोष कुमार लाहोटी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मुंबई स्थित चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के एसोसिएट डायरेक्टर विमल परवाल तथा इंदौर के 39 वर्षों के अनुभव वाले वरिष्ठ निवेशक बसंत बाहेती उपस्थित रहे। चर्चा का संचालन सीए विकास जैन, पूर्व अध्यक्ष ईआईआरसी आईसीएआई एवं संस्थापक निदेशक, मेरफिन एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड ने किया। विशेषज्ञों ने इक्विटी, म्यूचुअल फंड, सोना, चांदी तथा विभिन्न विविधीकृत क्षेत्रों में अनुशासित और दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि धैर्य, विश्वसनीय संस्थानों पर विश्वास और सूचित निर्णय ही स्थायी संपत्ति निर्माण की कुंजी हैं, न कि अल्पकालिक सट्टा प्रवृत्तियाँ। वक्ताओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे निरंतरता, दृढ़ विश्वास और दीर्घकालिक दृष्टिकोण ने उन्हें सफलता दिलाई।

कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका पर भी विशेष चर्चा हुई। निवेश विश्लेषण, जोखिम आकलन और पोर्टफोलियो प्रबंधन में एआई के प्रभावी उपयोग को भविष्य की दिशा बताया गया। साथ ही, भारत के परिपक्व होते आर्थिक तंत्र के साथ निवेशकों की सोच में आए सकारात्मक बदलावों को भी रेखांकित किया गया। ममता बिनानी ने कहा, “भारत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां तकनीक से सशक्त और धैर्यपूर्ण निवेशक दीर्घकालिक संपत्ति का निर्माण कर सकते हैं। हमें पारदर्शिता, विश्वास और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर केंद्रित रहना होगा।”

संतोष कुमार लाहोटी ने कहा, “भारत की विकास गाथा अपार संभावनाएं प्रस्तुत करती है, लेकिन निवेशकों को ज्ञान, अनुशासन और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ आगे बढ़ना चाहिए। स्थायी संपत्ति सट्टेबाजी से नहीं, बल्कि निरंतर रणनीति, विश्वसनीय संस्थानों पर भरोसा और धैर्यपूर्वक निवेश से बनती है।” यह निवेशक सम्मेलन कोलकाता को एक सशक्त वित्तीय संवाद और रणनीतिक पूंजी भागीदारी के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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