बिना गर्भाशय निकाले रोबोटिक सर्जरी से हटाया गया विशाल फाइब्रॉइड

डॉक्टरों ने 32 हफ्ते की प्रेग्नेंसी जितनी बड़ी गांठ निकाली
बिना गर्भाशय निकाले रोबोटिक सर्जरी से हटाया गया विशाल फाइब्रॉइड
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मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पेट में लगातार असहनीय दर्द और भारी ब्लीडिंग से पीड़ित 34 वर्षीय महिला के लिए यह आम समस्या तब डरावनी बन गई, जब जांच में गर्भाशय में 32 हफ्ते की प्रेग्नेंसी जितना बड़ा फाइब्रॉइड और 4–5 सेमी के 5 अन्य फाइब्रॉइड पाए गए। गांठ के विशाल आकार के कारण महिला का गर्भाशय काफी फैल चुका था। आमतौर पर ऐसे मामलों में गर्भाशय निकालने (हिस्टेरेक्टॉमी) की नौबत आ जाती है, लेकिन CK बिड़ला हॉस्पिटल्स, CMRI के डॉक्टरों ने अत्याधुनिक मेडिकल साइंस के दम पर ऐसा चमत्कार कर दिखाया, जिससे न सिर्फ गर्भाशय सुरक्षित बच गया, बल्कि महिला कुछ ही दिनों में सामान्य जिंदगी में लौट आई। अस्पताल की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. परनामिता भट्टाचार्य की अगुवाई में टीम ने एडवांस्ड रोबोट-असिस्टेड मायोमेक्टॉमी की। इस मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया के जरिए डॉक्टरों ने 2.23 किलोग्राम वजनी कुल 6 फाइब्रॉइड्स सफलतापूर्वक निकाले और गर्भाशय को सुरक्षित बचा लिया। सर्जरी के बाद महिला को दर्द और भारी ब्लीडिंग से राहत मिली तथा वह कुछ ही दिनों में सामान्य जीवन में लौट आई।

3D विजन और सटीकता से मिली कामयाबी

डॉक्टरों ने रोबोटिक आर्म्स (बिल्कुल बारीक सर्जिकल औजारों) और 3D हाई-डेफिनिशन विजुअलाइजेशन का इस्तेमाल कर गर्भाशय के नाजुक हिस्सों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए उस भारी-भरकम गांठ को सफलता पूर्वक बाहर निकाल लिया। पारंपरिक ओपन सर्जरी में पेट पर बड़ा चीरा लगाना पड़ता था, जिसमें खून का भारी नुकसान, संक्रमण का डर और महीनों का बेडरेस्ट तय था। इसके उलट, रोबोटिक सर्जरी में सिर्फ छोटे-छोटे छिद्र किए गए। डॉक्टरों ने न सिर्फ फाइब्रॉइड को पूरी तरह खत्म किया, बल्कि महिला के गर्भाशय को भी सुरक्षित बचा लिया। इससे न केवल महिला का दर्द खत्म हुआ, बल्कि भविष्य में मां बनने (फर्टिलिटी) की संभावना भी बरकरार रही।

महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण

डॉ. परनामिता भट्टाचार्य ने बताया कि अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि बड़े फाइब्रॉइड का मतलब गर्भाशय निकालना ही है। लेकिन रोबोटिक तकनीक की बदौलत अब हम मुश्किल से मुश्किल केस में भी अंग को बचा सकते हैं। यह उन महिलाओं के लिए वरदान है जो अपनी फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) बरकरार रखना चाहती हैं।

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