

कोलकाता: अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर देशप्रिय पार्क की भाषा शहीद स्मारक वेदी से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा पर तीखा हमला बोला। भाषा शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि ताकत या धमकी के बल पर बंगाल की संस्कृति और अस्मिता को नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
पहले बंगाल को जानना है जरूरी
शनिवार शाम को भाषा दिवस समारोह से उन्होंने कहा, दिल्ली से आकर बंगाल पर कब्ज़ा नहीं किया जा सकता, पहले बंगाल को जानना होगा। जो लोग यहां की मिट्टी, लोगों और संस्कृति को नहीं समझते, वे क्या मछली-मांस खाना या साड़ी पहनना बंद करा देंगे? मुख्यमंत्री ने कहा कि 21 फरवरी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भाषाई एकता और मानवता का प्रतीक है। उन्होंने याद दिलाया कि 1950 में संविधान निर्माण के समय से ही बांग्ला भाषा आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त है और यह किसी की दया से नहीं मिली। ध्रुपदी भाषा के दर्जे को लेकर केंद्र पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विस्तृत शोध दस्तावेज भेजे, तब जाकर मान्यता मिली।
आखिर बंगाल के लोगों का क्या दोष है
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आज भी बांग्ला बोलने वालों को 'घुसपैठिया' कहकर प्रताड़ित किया जा रहा है और लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल में भी बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित अन्य राज्यों के लगभग 1.5 करोड़ से अधिक लोग काम करते हैं और उन्हें भाई-बहन की तरह सम्मान दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बंगाल के लोगों का क्या दोष है, जो उन्हें निशाना बनाया जा रहा है?
एकजुट होकर भाषा संस्कृति की रक्षा का आह्वान
उनका कहना है कि अपनी मातृभाषा में बात करना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे लोकतंत्र, सर्वधर्म समभाव और हर नागरिक के समान अधिकार के पक्ष में हैं। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एकजुट होकर भाषा और संस्कृति की रक्षा का आह्वान किया। उनका कहना है कि पहले बंगाल से प्रेम करना सीखना होगा। बंगाल देश और अपनी मिट्टी के लिए सब कुछ सह सकता है, यहां तक कि बलिदान भी दे सकता है, लेकिन किसी के सामने सिर नहीं झुकाता।