घर बैठे हो रहा डिलिमिटेशन, 32 लाख नाम अब भी गायब : ममता

सेंसस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठाए सवाल, राजनीतिक दलों को बाहर रखने का आरोप
फाइल फोटो
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प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने डिलिमिटेशन और जनगणना (सेंसस) की प्रक्रिया को लेकर केंद्र और प्रशासन पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। मंगलवार को फेसबुक लाइव के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे राज्य में डिलिमिटेशन और सेंसस का काम राजनीतिक दलों को पूरी तरह अंधेरे में रखकर "घर बैठे" एकतरफा तरीके से किया जा रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी राजनीतिक दल को प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया गया, तो आखिर यह कौन तय करेगा कि जनगणना और मतदाता सूची में किसका नाम रहेगा और किसका हटा दिया जाएगा? ममता ने दावा किया कि अब भी 32 लाख लोगों के नाम सूची में शामिल नहीं किए गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले पंचायतों, नगरपालिकाओं और जिला परिषदों पर कब्जा किया गया और अब लोकतांत्रिक संस्थाओं के बाद डिलिमिटेशन तथा जनगणना की प्रक्रिया को भी एकतरफा ढंग से संचालित किया जा रहा है। उनका कहना था कि इस पूरे अभियान में किसी भी राजनीतिक दल से न तो राय ली गई और न ही उन्हें कोई जानकारी दी गई।

मतदाता सूची और एसआईआर (SIR) के मुद्दे पर ममता ने कहा कि वह न्याय की उम्मीद लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गई थीं, लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिली। रवींद्रनाथ ठाकुर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी न्याय की आवाज खामोशी में सिसक रही है।

सभा और रैली की अनुमति नहीं मिलने पर ममता ने प्रशासन से चेतावनी भरे लहजे में कहा कि तृणमूल कांग्रेस को अनुमति नहीं देकर उसे नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि वह कानून का सम्मान करते हुए अनुमति मांगती हैं, लेकिन यदि प्रशासन ही कानून को ताक पर रखेगा, तो लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत आंदोलन और जनसंघर्ष और तेज किया जाएगा।

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